समय कैसे और क्यों धीमा होता है? How and why time slows? Special Theory of Relativity

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Special Theory of relatively
Time
Albert Einstein
Time is Realative.

तो दोस्तों यह एक बहुत ही कमाल का आर्टिकल हैं, क्योंकि मैंने आपको बहुत ही सरल शब्दों में भौतिकी के एक बहुत ही महान सिद्धांत के बारे में समझाया है, और वह भी इतनी सरल शब्दों में आपको इंटरनेट पर और कहीं नहीं मिलेगा। तो दोस्तों शुरू करते हैं, यह कमाल का आर्टिकल।

तो दोस्तों, Theory of relativity यानि कि सापेक्षता के सिद्धांत की खोज अल्बर्ट आइंस्टीन ने की थी, और उनकी यह खोज आगे जाके सच भी साबित हुई। तो आइए जानते हैं, यह क्या थी। सबसे पहले मैं आपको सापेक्षता के सिद्धांत के बारे में थोड़ा सा बता देता हूं, फिर इस आर्टिकल की शुरुआत करते हैं।

Theory of relativity

Theory of relativity को समझने के लिए पहले आपको कुछ सामान्य भौतिकी को समझना होगा| इस सिद्धांत के अनुसार, जो भी चीज प्रस्ताव में है, यानी मोशन में तो उसके लिए समय धीमा हो जाता है। तो दोस्तों, क्या सुनने में बहुत अजीब लगता है, लेकिन यह सच है। क्योंकि काफी सारे प्रयोगों में यह साबित हुआ है, और ऐसा सच में होता है।

तो दोस्तों, काफी लोग यह भी सोच रहे होंगे, कि आखिर साइंटिस्ट लोग को इस दुनिया के बारे में कैसे पता चल जाता है, जो चीज कौन सी छुपी हुई है, आखिर वह उनका भी पता कैसे लगा लेते हैं। तो दोस्तों, जितने भी वैज्ञानिक होते हैं वह इस दुनिया को काफी बारीकी से देखते हैं, जिसमें वह रहते हैं, और उनकी यह खूबी ही बड़े से बड़े सवालों का जवाब बता देती है।

तो दोस्तों, मैं आपको हर एक चीज उदाहरण के समझाऊंगा, जिससे आपको आसानी से समझ में आएगा, और वह भी बहुत सरल शब्दों में। Theory of relativity simple example

theory of relativity simple example

मान लो आप किसी चीज को देखते हो, तो आप उसे कैसे देख पाते? जाहिर सी बात है, अपनी आंखों से। लेकिन आंखों से भी कैसी दिखती है, जब उससे कोई लाइट टकराती है तो। यानी किसी वस्तु को देखने के लिए हमें लाइट की जरूरत होती है। लाइट की भी एक तय स्पीड है। और चाहे कुछ भी हो जाए वह कभी नहीं बदलती। और आइंस्टाइन को भी लाइट का जुनून था, वह अक्सर यह सोचते थे, कि आखिर लाइट हमारे ब्रह्मांड के बाकी सारी चीजों जैसे बर्ताव क्यों नहीं करती। और उनके इसी जुनून ब्रह्मांड के अब तक के सबसे, सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक का जवाब दिया।

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आइंस्टाइन हमेशा यह सोचते थे, की लाइट की गति क्यों नहीं बदलती, जैसे बाकी सब चीजों की गति बदलती है। जैसे उदाहरण के तौर पर, मान लो कोई ट्रेन जा रही हैं, 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से, और अगर आप ट्रेन की छत के ऊपर, ट्रेन के साथ आगे दौड़ लगाते हैं, आप की रफ्तार हो जाएगी 105 की, और अगर आप उल्टी दिशा में दौड़ लगाते हैं, ट्रेन की छत के ऊपर, तो आप की रफ्तार हो जाएगी 90 की। लेकिन हम ट्रेन की छत के ऊपर खड़े होकर, लाइट को आगे मारे या पीछे उसकी रफ्तार कभी नहीं बदलेगी, तो ऐसा क्यों होता है, क्यों लाइट की रफ्तार कभी नहीं बदलती, यह सवाल हमेशा उनके दिमाग में रहता था।

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Two Lakh NinetyNine Thousand Three Hundred Thirty Eight. Km/s

एक दिन जब वह, अपने काम पर जा रहे थे, तब उन्हें अपने शहर की एक बड़ी घड़ी दिखाइ दी, तब उन्होंने उस घड़ी को देखकर सोचा, की प्रकाश ही मुझे वर्तमान दिखाता हैं। फिर, उनके दिमाग में एक अचानक से विचार आया, की जो वह देख रहे हैं, वह तो वर्तमान है, ही नहीं। वह, तो पास्ट टाइम यानी भूतकाल है, क्योंकि लाइट की गति सीमित है, लाइट को कुछ ना कुछ तो समय लगेगा उस घड़ी से उनकी आंखों तक पहुंचने में। और उनके एक विचार ने हि, आज की मॉडर्न फिजिक्स यानी आधुनिक भौतिकी को पूरी तरह से बदल दिया।

फिर उन्होंने अपनी आपसे एक सवाल पूछा, “कि उस घड़ी के समय को मुझे अगर वर्तमान में देखना होगा?” तो मुझे क्या करना पड़ेगा। और बस इसी सवाल में उन्हें अब तक के सबसे महान थ्योरी, के पास लेकर गया।

जैसा कि हम सब जानते हैं, कोई चीज अगर किसी गति से मोशन यानी प्रस्ताव में है, तो उसकी स्पीड यानी गति को जानने की लिए, हमें पहले अपनी गति देखनी पड़ती है, और जितनी हमारी गति है, उसको उस गति में से, घटाव करना पड़ता है। और अगर हम रुके हुए हैं, तो जितनी गति उसकी है, उतनी ही वास्तविकता में होती है। लेकिन अगर हमारी गती बड़ जाए, तो हमें उसकी गति कम लगने लगती है। तो, इसके अनुसार हम यह कह सकते हैं, कि उस घड़ी को वर्तमान में देखने के लिए, हमें लाइट की स्पीड से, उस घड़ी तक पहुंचना पड़ेगा, क्योंकि अगर हम लाइट की स्पीड से, उस घड़ी तक जाएंगे, तो हमें लाइट की स्पीड 0 लगने लग जाएगी, क्योंकि उसकी गति में से जब हम अपनी गति घटाव करेंगे तो हमें शून्य मिलेगा।

लेकिन, लाइट की गति यानी स्पीड, तो कभी कम होती ही नहीं है। तो हम उस घड़ी को वर्तमान में कैसे देखेंगे। तो यहां पर आप ध्यान दीजिए, स्पीड के और दो कॉम्पोनेंट यानी अंग होते हैं। डिस्टेंस यानी दूरी और समय। तो यहां पर घड़ी से हमारी दूरी तो उतनी ही रहेगी, यानी दूरी कम नहीं होगी, तो जाहिर सी बात है, यहां पर समय को स्लो होना पड़ेगा। क्योंकि स्पीड निकालने के लिए हमें दूरी को समय से भाग यानी डिवाइड करना पड़ता है।

(Speed = Distance÷Time)

तो यहां पर, स्पीड तो कम नहीं होगी, और दूरी भी उतनी रहेगी, तो यहां पर जाहिर सी बात है, समय को स्लो होना पड़ेगा। तो दोस्तों, ब्रह्मांड कभी भी लाइट की स्पीड के साथ कोई छेड़खानी नहीं करता, भले ही उसके लिए उसे टाइम के साथ छेड़खानी करने पड़े। लेकिन ब्रह्मांड कभी भी लाइट की स्पीड को स्लो नहीं करेगा। तो दोस्तों, अब आपको समझ में आ गया होगा, कि समय स्लो कैसे होता है।

तो दोस्तों पूरे इंटरनेट पर, इस प्रकार आज तक किसी ने भी समझाया होगा, और वह भी इतने सरल शब्दों में। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट जरुर कीजिए और हमारी वेबसाइट के बाकी सारे आर्टिकल भी जरूर पढ़िए।

तो दोस्तों Theory of Relativity के बारे में