ईवीएम क्या है? EVM के कार्य, सर्वप्रथम ईवीएम का प्रयोग, कैसे चलती है?

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evm kya hai ईवीएम क्या है

अनुक्रम

ईवीएम क्या है? What is EVM?

ईवीएम एक ऐसी मशीन है जिसका उपयोग करके मतदाता इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से अपने वोट को डालता है। EVM के माध्यम से कम समय में वोटो की गिनती करने में सहायता मिलती है। EVM का फुल फॉर्म इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है इसका स्ट्रक्चर दो यूनिटों से मिलकर बना होता है एक यूनिट कंट्रोल यूनिट कहलाती है और दूसरी यूनिट बैलेट यूनिट होती है।

बैलेट यूनिट का प्रयोग मतदाता द्वारा किया जाता है। बैलेट यूनिट में उसके सामने कुछ कैंडिडेट के नाम व चिन्ह होता है जिसके लिए वह चुनाव करता है कि उसे वोट किसे देना है और उसी के सामने का बटन दबाता है कंट्रोल यूनिट अफसर द्वारा नियंत्रित होती है जिसमें वोटो की गिनती की जाती है वोट काउंटिंग के समय इस यूनिट का प्रयोग करके कम समय में वोटो की काउंटिंग करते ईवीएम में चुनाव में लड़ने वाले उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह के आइकन सामने दिए होते हैं जिसमें उम्मीदवार अपनी इच्छा अनुसार चुनाव चिन्ह के सामने लगे बटन को दबाकर इलेक्ट्रॉनिक साधनों का प्रयोग करते हुए अपने वोट का को डालता है।

भारत में EVM मशीन का आविष्कार प्रोफेसर एजी राव और रवि पूवैया के नेतृत्व वाली एक टीम ने की थी जो आईआईटी बम्बे में प्रोफेसर के पद पर थे।

EVM Full Form in English

EVM- Electronic Voting Machines

ईवीएम मशीन कैसे चलती है?

EVM मशीन को चलाने के लिए दो यूनिटों का प्रयोग होता है एक यूनिट मतदाता के लिए होती है और दूसरी यूनिट अफसर के लिए होती है यह दोनों यूनिटी एक केबल केबल के माध्यम से जुड़ी होती हैं। मतदाता अपनी यूनिट में दिए गए उम्मीदवारों के लिस्ट के सामने बटन का प्रयोग करते हैं वहीं आप यूनिट में अफसर काउंटिंग के वक्त मतदाता द्वारा दिए गए वोटो की गिनती करते हैं। एक EVM मशीन में अधिकतम 64 मतदाताओं के नाम एक साथ दिखाए जा सकते हैं। वही एक EVM मशीन में एक बार में 3840 वोटो को गिन सकती है।

भारत में ईवीएम का सर्वप्रथम प्रयोग कब हुआ?

भारत में EVM का प्रयोग सबसे पहले 1982 में किया गया था। 1982 में के केरल के विधानसभा चुनाव में 50 मतदान केदो पर EVM के द्वारा वोटिंग कराई गई थी हालांकि इसके द्वारा कराई गई वोटिंग को सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया था वहां पर बाद में दोबारा चुनाव कराए गए थे सुप्रीम कोर्ट के खारिज करने के बाद 1989 में EVM के इस्तेमाल पर एक अधिनियम बना l अधिनियम बनने के बाद फिर भारत के चुनाव में EVM का प्रयोग होने लगा।

ईवीएम के द्वारा भारत में पहली बार निष्पक्ष चुनाव

भारत में EVM के द्वारा पहली बार निष्पक्ष चुनाव 1998 में मध्य प्रदेश राजस्थान और दिल्ली में हुए चुनाव के दौरान प्रयोग किया गया था कुल 45 सीटों पर चुनाव ई.वी.एम के द्वारा हुआ था धीरे-धीरे इसका प्रयोग बढ़ता गया और साल 2000 के बाद लोकसभा विधानसभा उपचुनाव में ईवीएम के द्वारा चुनाव कराया जाना लगे।

ईवीएम के द्वारा आसान वोटिंग गिनती

भारत में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों का प्रयोग किया जाने लगा है इसका फायदा यह हुआ है कि चुनाव में लगने वाला समय और वोटो की गिनती में लगने वाले समय को कम किया जा सके। EVM के प्रयोग से आज के दौर में हुए चुनाव में वोटो की गिनती आसानी से की जाने लगी है।

ईवीएम के द्वारा कम समय में चुनाव का होना

भारतीय चुनाव आयोग द्वारा भारत के चुनाव में प्रयोग किया जाने वाले ईवीएम मशीन के द्वारा वर्तमान समय में बहुत ही कम समय में और निष्पक्ष तरीके से चुनाव को संपन्न कराया जाता है EVM के द्वारा होने वाले चुनाव में वोटो की गिनती भी कम समय में की जाती हैl EVM के संपन्न चुनाव में खर्च और समय की भी बचत होती है।

ईवीएम की आवश्यकता?

1960 के दौर में बहुत सारे उम्मीदवार मतदाताओं को अपने धन और बल के द्वारा अपने पक्ष में कर लेते थे इसका बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाने लगा जिसे हम आज के दौर में बूथ कैप्चरिंग कहते हैं। भारतीय चुनाव आयोग बूथ कैप्चरिंग की घटनाओं से बचने के लिए नए उपायों की खोज करने लगे इस खोज के चलते धीरे-धीरे EVM से चुनाव कराने की चर्चा होने लगी फलस्वरुप 1982 में इसका पहला प्रयोग किया गया हालांकि पहले प्रयोग में सुप्रीम कोर्ट ने इस से होने वाले चुनाव को सिरे से खारिज कर दिया था लेकिन बाद में इसमें होने वाले गड़बड़ियों को सुधारते हुए चुनाव आयोग ने 1998 से दोबारा चुनाव ईवीएम के माध्यम से होने लगे

भारत में ईवीएम पर होने वाले विवाद

EVM से चुनाव होने के बाद सत्ता पक्ष के राजनीतिक दल ईवीएम को सही और सुचारू रूप से चलने वाले बताते हैं लेकिन विपक्ष राजनीतिक दल चुनाव में हारने के बाद ईवीएम पर सवाल खड़े कर देता थे कि ईवीएम के द्वारा चुनाव को मोड़ा जा सकता है जिससे चुनाव आयोग के सामने विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम को लेकर विवाद करने लगे। सत्ता पक्ष से बाहर होने वाली विपक्षी पार्टियों ने साल 2009 में पहली बार EVM पर विवाद खड़े किए।

इसके बाद धीरे-धीरे विपक्षी पार्टियों इस विवाद को और बढ़ने लगी साल 2010 में भाजपा नेता जीबी नरसिम्हा राव ने भी इस पर विवाद खड़ा कर दिया 2017 में हुए पांच राज्यों में चुनाव को लेकर 13 राजनीतिक दल ने चुनाव आयोग के सामने ईवीएम मशीन की जगह वैलेट पेपर से चुनाव कराने को कहा। इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं EVM को लेकर दर्ज हुई। ईवीएम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दर्ज सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया वर्तमान समय में अब ईवीएम के माध्यम से ही अधिकतर चुनाव संपन्न कराए जाते हैं।

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भारत में ईवीएम बनाने वाली कंपनियों

भारत में ईवीएम मशीन की प्रोडक्टिविटी दो स्थानों बेंगलुरु और हैदराबाद की जाती है पहली EVM इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग कब और कहाँ किया गया था हैदराबाद में भारत की पब्लिक सेंटर कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन आफ इंडिया ( ECIL )और बेंगलुरु में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का उत्पादन करते हैं।