The Briefer History Of Time 2nd Chapter – Our Evolving Picture Of The Universe Summary

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नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आप लोगों का “the brief history of time” के दूसरे चैप्टर “our evolving picture of the universe” यानी “ब्रह्माण्ड की विकसित हो रही तस्वीर” की summary मे।यहाँ हम इस चैप्टर की महत्वपूर्ण बातों को आसान शब्दो मे समझेंगे।तो चलिए शुरू करते है।

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इस चैप्टर में stephen hawking बताते हैं कि पहले बहुत लोग यह समझते थे कि पृथ्वी चपटी है लेकिन 340 b.c. मे एक ग्रीक दार्शनिक(philospher) जिनका नाम aristotle था उन्होंने सबसे पहले ये दावा किया कि पृथ्वी गोल है न कि चपटी।उन्होंने अपनी बात को साबित करने के लिए कई उदाहरण दिए।
जिनमे से एक था चंद्र ग्रहण,aristotle ने बताया कि चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच में आ जाती है जिस कारण पृथ्वी की परछाई चांद पर पड़ती है। मगर जो बात देखने वाली है वह यह है कि वह परछाई हमेशा गोल होती है, अब अगर पृथ्वी चपटी है तो वह परछाई तभी गोल होनी चाहिए जब सूर्य पृथ्वी के केंद्र की तरफ हो और वरना वह परछाई चपटी पृथ्वी और सूर्य की जगह पर निर्भर करनी चाहिए मगर जैसा हम देखते हैं कि वह परछाई हमेशा ही गोल होती है जिससे हम कह सकते हैं कि पृथ्वी गोल है।इसी किसी के साथ साथ एरिस्टोटल ने और भी कई उदाहरण दिए थे और अपनी बात को सिद्ध किया था।
asristotle की ब्रह्मांड की इस तस्वीर मे पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में थी,उनको लगता था कि सभी objects चाहे वह सूर्य हो या चाँद सभी पृथ्वी का चक्कर लगाते है। मगर ब्रह्मांड की इस तस्वीर में परेशानी यह थी कि कोई भी ग्रह सीधी तरीके से पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए नहीं प्रतीत होता था।इसके बाद ptolemy नामक एक विज्ञानकर्ता ने aristotle की खोज से प्रभावित होकर ब्रह्मांड की एक और तस्वीर बनाई। इस तस्वीर में भी पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में थी और बाकी सभी ऑब्जेक्ट पृथ्वी का चक्कर लगा रहे थे, इसमें सभी ऑब्जेक्ट को 8 rings मे बांटा गया था।इसमें जो ring पृथ्वी के सबसे पास थी उसमें सबसे छोटे ऑब्जेक्ट्स थे और जो सबसे दूर थी उसमें सबसे बड़े objects थे।और इसमें जो ग्रह थे वो अपनी ring के अनुसार पृथ्वी का चक्कर तो लगाते ही थे साथ मे एक चक्कर अपने ही केंद्र का भी लगाते थे।आप यहाँ क्लिक करके इस मॉडल पर एक वीडियो देखकर इसको बेहतर समझ सकते है।

यह थ्योरी ग्रहों के अजीब और उल्टे सीधे orbit को भी समझाती थी मगर इस थ्योरी के अनुसार हमारा चांद अपने ऑर्बिट में एक समय पर सामान्य से दोगुना ज्यादा पृथ्वी के पास आ जाना चाहिए था जो कि वास्तविकता से बहुत दूर था इस कारण इस थ्योरी को किसी ने भी नहीं माना।हालांकि church ने ब्रह्मांड की इस थ्योरी को मान लिया क्योंकि यह थ्योरी उनके ग्रंथो से मिलती थी।
इसके बाद वर्ष 1514 में कॉपरनिकस नामक व्यक्ति ने अपनी खुद की थ्योरी दी जिसमें उन्होंने कहा कि सूर्य एक स्थान पर स्थिर होता है और बाकी सभी ग्रह उसका चक्कर लगाते हैं। उस समय में उनकी इस थ्योरी को किसी ने नहीं सराहा बल्कि church ने तो उनको उनकी इस थ्योरी के लिए दंड भी दिया।इस बात के 100 साल बाद दो वैज्ञानिक Johannes Kepler और Galileo Galilei ,कॉपरनिकस की इस थ्योरी का समर्थन करने लग गए। गैलीलियो ने अपने टेलिस्कोप से बृहस्पति ग्रह को देखा और यह पाया कि कई चांद बृहस्पति ग्रह का चक्कर लगा रहे थे। इससे उन्होंने यह बात समझी कि यह जरूरी नहीं की सभी ऑब्जेक्ट्स सीधा पृथ्वी का चक्कर लगाएं। यह बात केपलर ने यह पाया कि कॉपरनिकस की थ्योरी बिल्कुल सही थी लेकिन ग्रह सूर्य का गोलाकार ऑर्बिट में चक्कर ना लगा कर, एक अंडाकार ऑर्बिट मे सूर्य का चक्कर लगाते हैं। यह थ्योरी बिल्कुल भी सही साबित हुई और इसके बाद ptolemy की थ्योरी का अंत हो गया।
हालांकि केपलर ने कॉपरनिकस की थ्योरी को विकसित करके एक बिल्कुल ही सही थ्योरी निकाल दी थी लेकिन अभी भी वह यह बात नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर ग्रह सूर्य का अंडाकार ऑर्बिट में चक्कर क्यों लगाते हैं।
इसके बाद 1687 मैं न्यूटन द्वारा लिखी गई किताब “Philosophiae Naturalis Principia Mathematica” ने यह समझाया कि एक विशेष प्रकार का बल है जो सभी वस्तुओं को पृथ्वी की ओर खींचता है और वही बल पृथ्वी और बाकी सभी ग्रहों को सूर्य का अंडाकार ऑर्बिट में चक्कर लगाने के लिए भी जिम्मेदार है,इस बल को उन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल नाम दिया।
फिर इसी बल के आधार पर उन्होंने एक ऐसी गणित का निर्माण किया जो ये समझा सके कि गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार से अलग-अलग वस्तुओं पर काम करता है। यह पहली बार था कि किसी ने एक ऐसा नियम बनाया जो पृथ्वी और पृथ्वी के बाहर के पूरे ब्रह्मांड में हर जगह लागू हो रहा था।ये आज की आधुनिक भौतिकी(physics) और खगोल-विज्ञान(astronomy) की शुरुआत थी।
इस पूरे सफर में हमने जाना कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र नहीं है बल्कि पृथ्वी क्या हमारे सूर्य और शायद हमारी आकाशगंगा भी इस ब्रह्मांड का केंद्र नहीं है। इस खोज ने मानव जाति की सोच को पूरी तरह बदल दिया और आज की आधुनिक सोच का निर्माण किया।
दूसरे चैप्टर में इतना ही था दोस्तों  मैं आशा करता हूं कि आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी अगर आपको हमारी यह समरी अच्छी लगी तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों में शेयर करें  जिससे हम ऐसे ही नए-नए आर्टिकल आपके लिए ला पाये। अगर आपको कुछ पार्ट अच्छा ना लगा हो तो आप हमको कमेंट में बता सकते हैं हम अगली बार बेहतर बनने की पूरी कोशिश करेंगे।

 आपसे मुलाकात होगी फिर किसी अंतरिक्ष के  रोमांचक और ज्ञानवर्धक टॉपिक के साथ। तब तक के लिए जय हिंद!

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