रक्षाबंधन क्यों मनाते है और इसका इतिहास क्या है?

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रक्षाबंधन क्या है रक्षाबंधन आने वाला है यह सुनते ही हर भाई की बहन इंतजार करती है कि कब वह अपने भाई की कलाई में राखी बांधे और उससे अच्छे-अच्छे गिफ्ट ले. लेकिन इसके चलते बहुत से लोगों के मन में यह ख्याल भी आता है कि आखिर रक्षाबंधन क्यों और कैसे मनाया जाने लगा आज हम आपको यह भी बताएंगे और रक्षाबंधन से जुड़ी बहुत सी जानकारी आपको देंगे. लेकिन हमारे इंडिया में भाई बहन के रिश्ते को बहुत ही ज्यादा पवित्र माना जाता है और यह त्योहार हमारे इंडिया में ही नहीं बल्कि इसे नेपाल और बहुत से देशों में मनाया जाता है.

अनुक्रम

रक्षाबंधन क्या है-

रक्षाबंधन शब्द में दो शब्द होते हैं, “रक्षा” और “बंधन” इन दोनों शब्दों से मिलकर रक्षाबंधन बनता है. संस्कृत भाषा में इस त्यौहार का मतलब बताया गया है की “एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो” यहां पर “रक्षा” का मतलब रक्षा प्रदान करना होता है. उधर “बंधन” का मतलब होता है एक ऐसी डोर, एक ऐसी हाथ में पहनने वाली राखी जोकि भाई के लिए रक्षा का प्रतीक है. 

वहीं दूसरी और रक्षाबंधन को भाई-बहन का प्रतीक भी माना जाता है. हमारे इंडिया में बहुत सी ऐसी मान्यताएं हैं. वही रक्षाबंधन एक खून के रिश्ते को भी दर्शाता है बल्कि यह एक पवित्र रिश्ते को भी जताता है. यह त्यौहार खुशी प्रदान करने वाला तो होता ही है वही बहनों के लिए यह त्यौहार काफी ज्यादा खुश कर देने वाला होता है क्योंकि बहने इस त्यौहार में अनेकों गिफ्ट मिलने पर खुश होती हैं.

रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं-  

रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जोकि यह दर्शाता है कि आपका आपकी बहन के प्रति क्या कर्तव्य है और आप अपनी बहन की हर हालत में रक्षा करेंगे और यह त्यौहार यह जाहिर करता है. कि भाई अपनी बहन के प्रति वह हर कर्तव्य को निभाएगा जो कि हमारे वेद पुराणों से चला आ रहा है. 

 यह त्योहार चाहे सगा भाई बहन हो या फिर कोई भी बहन व भाई हो. कोई भी मना सकता है. बस केवल इसकी मर्यादा को समझते हुए इस पर्व के मौके पर एक बहन अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है. वही हर बहन अपने भाई के लिए इस दिन उसकी रक्षा की कामना करती है. वह भगवान से यह दुआ मांगती है कि उसका भाई हमेशा खुश रहे उसका स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहे. वही इसके बदले में भाई भी अपनी बहन के लिए दुआ मांगता है और उसे उपहार देता है और उसे यह वादा करता है कि उसका भाई हर विपत्ति में उसके साथ खड़ा रहेगा व अपनी बहन को किसी भी संकट में आने से बचाएगा व हमेशा उसकी रक्षा करेगा. इसी मान्यता को देखते हुए हमारे भारत में भाई बहन के त्यौहार को मनाया जाता है.

रक्षाबंधन के कौन-कौन से नाम है-

रक्षाबंधन को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे इसे राखी का त्यौहार, सलूनों का त्यौहार, श्रावण पूर्णिमा का त्यौहार, के रूप में इसको हिंदू धर्म में मान्यता दी जाती है और यह त्यौहार हर साल के अगस्त में श्रावण पूर्णिमा के दिन ही आता है. लेकिन “भैया दूज” को भी बहुत से हमारे भारतीय लोग रक्षाबंधन मानते हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है भैया दूज एक अलग त्यौहार है.

रक्षाबंधन का इतिहास-  

अगर हम रक्षाबंधन का इतिहास खोजने लग जाएं तो हम देखेंगे कि रक्षाबंधन का इतिहास सम्राट अलेक्जेंडर और 300 BC से भी ज्यादा पुराना है.

1- सम्राट अलेक्जेंडर और सम्राट पुरु-

इस राखी तोहार के सबसे पुरानी कहानी सन 300 BC में सामने आई थी. उस वक्त अलेक्जेंडर ने भारत जीतने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ यहां आया था. उस वक्त भारत में सम्राट पुरू का काफी बोल वाला था. जहां अलेक्जेंडर ने कभी किसी से भी हार नहीं मानी थी. लेकिन उन्हें सम्राट पुरू की सेना से लड़ने में काफी दिक्कत हुई. जब एलेग्जेंडर की पत्नी को रक्षाबंधन के बारे में पता चला तब उन्होंने सम्राट पूरू के लिए एक राखी भेजी थी अपने भाई के नाते और यहीं से ही पहला किस्सा सामने आया.  जिससे कि वह एलेग्जेंडर को जान से ना मार दें वहीं पुरू ने भी अपनी बहन का कहना माना और एलेग्जेंडर पर हमला नहीं किया.

2- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार-

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भविष्य पुराण की कथा में धरती की रक्षा के लिए देवता और असुरों में 12 साल तक युद्ध चला लेकिन देवताओं को विजय नहीं मिली तब देव गुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी शची को श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षासूत्र बनाने के लिए कहा वही इंद्राणी ने  व्रत रखकर एक रक्षा सूत्र बनाया वह रक्षा सूत्र इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा और फिर देवताओं ने असुरों को पराजित कर दिया जिससे यह माना जाने लगा के इस रक्षा सूत्र में सही में काफी शक्ति होती है. 

यह तो कुछ सबसे पौराणिक कहावतें थी लेकिन अब रक्षाबंधन की हजारों से ज्यादा कथाएं आपको हमारे इतिहास में देखने को मिल जाएंगी जिसमें से जो खास है वह यह है-

3- वामन अवतार कथा यह कथा-

 यह कथा भगवान विष्णु की है जो असुरों के राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने बलि से वरदान मांगने के लिए कहा तभी बलि ने उनसे पाताल लोक में बसने का वरदान मांगा. लेकिन बली के वरदान की वजह से भगवान विष्णु पाताल लोक चले गए.

इसके चलते माता लक्ष्मी और सभी देवता काफी चिंतित हुए लेकिन वही तब मां लक्ष्मी ने गरीब स्त्री के वेश में  पाताल लोक जाकर बली को राखी बांधी और भगवान विष्णु को वहां से वापस ले जाने का वचन मांगा. क्योंकि यह माना जाता है कि जब कोई भी बहन अपने भाई के राखी बांधती है तो उसके बदले में भाई को वह चीज देनी होती है चाहे वह उसका भाई हो या फिर नही.

4-  द्रौपदी और श्री कृष्णा की कथा- 

पुराणों के अनुसार और महाभारत काल के अनुसार महाभारत काल में श्री कृष्ण और द्रौपदी को भाई बहन माना जाता है. उसका कारण यह है कि पौराणिक मान्यताओं में शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्री कृष्ण की तर्जनी उंगुली कट गई थी उसी के दौरान द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़ कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी थी. जिस दिन वह अंगुली पर पट्टी बांधी थी वह दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था तभी से रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है. लेकिन कृष्ण ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए चीरहरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी. इससे पहले भी श्रावण पूर्णिमा के दिन भी इस त्यौहार को मनाया गया.

➤रक्षाबंधन की पॉपुलर शायरियां 2020- 

1-“रक्षाबंधन का त्यौहार है हर तरफ खुशियों की बौछार है,

 बंधा एक धागे मैं भाई बहन का प्यार है,

2-कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी

 प्यार और मीठी शरारती की ओर है राखी

 भाई की लंबी उम्र की दुआ है राखी

 बहन ने के पवित्र प्यार की दुआ है राखी

 हैप्पी रक्षाबंधन”

3-“रंग बिरंगे मौसम में सावन की घटा छाई है

 खुशियों की सौगात लेकर बहना राखी बांधने आई है

 बहनों  कि राखी से  सजी आज भाई की कलाई

 सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई.”

4-“यह लम्हा कुछ खास है बहन के हाथों में भाई का हाथ है

ए बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है

 तेरे सुकून की खातिर मेरी बहना तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है,”

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