आज तक का सबसे बड़ा एकीकृत महाद्वीप।(largest supercontinent of earth)

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नमस्कार दोस्तों, क्या आप लोगों ने कभी सोचा है कि क्या होगा अगर हम सभी महाद्वीप( एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, दक्षिण और उत्तरी अमेरिका) को एक साथ जोड़ दे तो।उनका आकार कैसा होगा??वह अंतरिक्ष से कैसा दिखेगा??
तो दोस्तों मैं आप लोग को बता दूँ कि यह बात आप लोगों के लिए नई होगी मगर हमारी पृथ्वी ऐसे विशाल महाद्वीपों की आदि है।पृथ्वी के इतिहास में ऐसा कई बार हो चुका हैं।वैज्ञानिकों का मानना है कि हर 200 करोड़ से 300 करोड़ साल के अंतराल मे पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक होकर एक विशाल एकीकृत महाद्वीप बनाते हैं।अब तक ऐसे सात बड़े एकीकृत महाद्वीपों की खोज हो चुकी है।

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आज तक का सबसे बड़ा एकीकृत महाद्वीप pangea था।जो कि टेक्टोनिक प्लेट्स के हिलने के कारण बना था और फिर उसी कारण से वापस टूट गया था।

अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ये टेकटोनिक प्लेट्स आखिर क्या चीज़ है और इनके हिलने से या बोले गति करने से ये महाद्वीप अपनी जगह क्यों बदल लेते है।तो इस सबको समझने के लिए आइये एक बार टेक्टोनिक प्लेट्स को विस्तार से समझ लेते है।

टेक्टोनिक प्लेट्स(tectonic plates)

असल मैं पृथ्वी की सतह पूरी एक ना होकर 7 बड़े और 8 छोटे टुकड़ों में टूटी हुई है। इन टुकड़ों को टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है।ये टेक्टोनिक प्लेट्स एक जगह पर स्थिर न रहकर हमेशा चलती रहती हैं।

टेकटोनिक प्लेट्स का आकार
Created by eric baba(wikipedia)

अब इस पर आप लोगों का यह सवाल होगा कि फिर टेक्टोनिक प्लेट्स हमें चलती हुई क्यों नहीं दिखती हैं और हमारा नक्शा तो 100 साल पुराना है और इन 100 सालों में किसी भी महाद्वीप ने अपनी जगह नहीं बदली है। तो फिर यह कैसे सिद्ध होता है कि टेक्टोनिक प्लेट्स अपनी जगह बदलती है??
यह सवाल तो अच्छा है, मगर मैं आप लोगों को बताना चाहूंगा कि यह एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया होती है। टेक्टोनिक प्लेट्स की गति 1 साल में 0.6cm से 10cm तक ही होती है। जिसका मतलब यह है कि यह प्लेट्स 1000 साल में भी 100 मीटर से ज्यादा नहीं हिलती, इसीलिए इंसानों द्वारा इनको देखना असंभव है। लेकिन हमारी धरती लगभग 4,50,00,00,000 साल पुरानी है।

मैं चाहता तो इसको 4.5 अरब वर्ष भी लिख सकता था लेकिन मै चाहता था कि आप खुद इन शुन्यो की संख्या को महसूस करे और अपने आम कैलेंडर के वर्षों के शुन्य से इसकी तुलना करें और समझे की ये पृथ्वी कितनी पुरानी है ।इसके इतने बड़े जीवनकाल में टेकटोनिक प्लेट्स की धीमी गति ने भी कई बड़े बदलाव लाये है।ये बदलाव दिलचस्प इसलिए है क्योंकि इसमें जो महाद्वीप थे वो तो आज की पृथ्वी से अलग थे ही साथ ही साथ जानवर और अन्य जीव जंतु भी काफी अलग और दिलचस्प थे।मैं पृथ्वी के इस पुरे रोमांचक इतिहास को केवल इस एक article के जरिये तो नही समझा सकता।मगर आपको अगर ये article पसंद आये तो आप कमेंट जरूर करे जिससे मैं फिर इसी तरह के और आर्टिकल्स आप लोगो के लिए ला सकू और हमारी पृथ्वी के भूगोल के इतिहास के बारे मे ज्यादा से ज्यादा जानकरी आपको दे सकू।

Pangea Supercontinent

तो अब आप लोग टेक्टोनिक प्लेट के बारे में समझ चुके होंगे तो फिर वापस चलते हैं हमारे मुख्य टॉपिक pangea पर।
पेनजिया(pangea) आज से 33.5 करोड़ साल पहले बना और 17.5 करोड़ साल पहले टूटने लगा।ये दक्षिणी गोलार्ध में था और एक महा-महासागर(superocean) Panthalassa से घिरा हुआ था।उस समय ये थोड़ा ऐसा दिखता था।

इसमें आप लोगो को अपना भारत तो दिख ही गया होगा।मगर इस भारत पर अभी इंसान नही रहते।अभी इंसानों को आने मे तो 31.5 करोड़ साल का वक़्त है।तो फिर dinasaurs??जी नही अभी उनके आने मे भी 17.5 करोड़ सालो का वक़्त है।तो फिर अभी यहाँ है क्या?जी,अभी यहाँ पर जीवन तो है और आज से 10 गुना ज्यादा है।यहाँ कई तरह के पेड़ है,सूक्ष्म जीव है,जानवर है,reptiles है और बहुत ही बड़ी तादाद मे कीड़े मकोड़े है।pangea मे ही पेड़ो ने पहली बार बीजो के द्वारा उगना शुरू किया था,pangea ही वह जमीन था जहाँ पहले कीड़े मकोड़े फैले थे।reptiles ने भी पहला कदम pangea पर ही रखा था।मगर हम उस समय के सागरो के बारे मे ज्यादा नही जानते क्योंकि उनके बारे मे जो भी जानकारी थी वो महासागरों मे खो चुकी है क्योंकि महासागर हर 20 करोड़ वर्ष मे पूरी तरह बदल जाते है और फिर उससे पहले के उनके इतिहास को जानना असंभव हो जाते है हालाँकि ये बात हम जानते है कि यहाँ जमीन से ज्यादा जीवन समुन्द्रों मे है क्योंकि जीवन की शुरुआत समुन्द्र से ही हुई थी।यहाँ ऑक्सीजन आज से दो गुना ज्यादा है और कार्बन-डाइऑक्साइड काफी कम।हालांकि यहाँ का तापमान काफी गर्म है लेकिन जीवन बहुत अच्छा चल रहा है।
मगर तभी कुछ ऐसा होता है जिससे ये सब खत्म हो जाता है।90%से ज्यादा species मर जाती है ,पूरा atmosphere कार्बन से भर जाता है।इस को हम कहते है Permian–Triassic extinction event।ये आजतक की सबसे बड़ी तबाही थी जो किसी asteroid या comet के गिरने से नही बल्कि पृथ्वी के ही हालातों के कारण हुई थी।अगर आप इसके बारे मे जानना चाहते है तो आप comment मे लिख सकते है।

आज के लिए इतना ही हालांकि अभी कहानी खत्म नही हुई है मगर शब्द सीमा पूरी हो चुकी है तो अगर आप इसका अगला part देखना चाहते है तो कमेंट करे और notifications on करले।आपसे मुलाक़ात होगी फिर किसी और दिलचस्प टॉपिक के साथ तब तक के लिए जय हिंद।

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