पृथ्वी का सबसे बड़ा हिम युग! हुरोनियन Largest Huronian ice age

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नमस्कार दोस्तों, आप लोगों ने ice age (हिमयुग) के बारे में तो जरूर सुना होगा। कुछ ने ice age फिल्म या उसके किसी प्रोमो के दौरान तो किसी ने इंटरनेट पर या दोस्तों से। Ice age(हिमयुग) को आमतौर पर एक ऐसा युग समझा जाता है, जिसमे हर जगह सिर्फ बर्फ ही बर्फ होती है मगर विज्ञान मे इसका मतलब होता है एक बहुत बड़े काल(समय) के लिए पृथ्वी के दोनों ध्रुवो(उत्तरी-ध्रुव(northpole) और दक्षिणी-ध्रुव(south pole)) पर से लेकर महाद्वीपो और सागरो तक भी बर्फ का जमना।इसमें पूरी पृथ्वी का बर्फ से जमना जरूरी नही मगर एक बड़ा हिस्सा बर्फ से जमा होने चाहिए।

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तो आज हम पृथ्वी की सबसे पहली,बड़ी और लंबी चलने वाले हिमयुग की बात करने वाले है जिसको हुरोनियन हिमयुग(huronian ice age) के नाम से जाना जाता है।असल मे यह नाम इसको तब मिला था जब एक वैज्ञानिक ने huron नदी का अध्ध्यन करके इस हिमयुग का पता लगाया।

तो चलिए शुरू करते है और जानते है इतिहास की इस सबसे बड़ी हिमयुग के बारे मे, कि आखिर ये क्यों हुई?कब हुई?उस समय पर पृथ्वी की परिस्थितियां कैसी थी?इससे उनपर क्या प्रभाव पड़ा?और सबसे बड़ी बात कि इससे फर्क किन किन जीवो को पड़ा? इन सभी सवालो के जवाब जानने के लिए पड़ते रहिये हमारा ये आर्टिकल।

Huronian Ice age (हुरोनियन हिमयुग)

हुरोनियन हिमयुग आज से 2.4 अरब साल पहले शुरू हुई थी और आज से 2.1 अरब साल पहले खत्म हुई।ये हिमयुग पृथ्वी की सबसे पहली हिमयुग थी, जिसका मतलब ये कि पृथ्वी के इतिहास मे ये पहली बार था कि पृथ्वी पर बर्फ जम रही थी ।इससे पहले पृथ्वी पर काफी गर्मी थी और किसी भी कोने मे बर्फ का नामो-निशान नही था।तो फिर ऐसा क्या हुआ कि हमारी गर्म पृथ्वी iceage(हिमयुग) का शिकार हो गयी।इस बात को समझने के लिए हमको कहानी शुरू से शुरू करनी होगी।

Iceage
पृथ्वी के सागरो मे जमती बर्फ और आती हुई iceage।

असल मे आज से 2.4 करोड़ साल पहले जब ये हुरोनियन हिमयुग शुरू हुई तो परिस्थितियां ये थी कि पृथ्वी के वातावरण मे केवल 0.02% ही ऑक्सीजन थी और बाकि methane गैस थी जैसे की आज के titan पर है और अगर जीवो की बात करे तो उस समय पृथ्वी पर unicellular organisms रहते थे। जो कि anaerobic respiration करते थे जिसका मतलब यह कि वो जीव बिना ऑक्सीजन के साँस लेते थे।

फिर उस समय कुछ ऐसा हुआ जिससे ऑक्सीजन 0.02% से सीधा 21% से भी ज्यादा हो गयी और जो methane पुरे वातावरण में फैली हुई थी उसका नामो-निशान मिट गया।इसको कहा गया great oxidation event(GOE) ।अगर आप इसके बारे मे जानना चाहते है तो कमेंट बॉक्स मे जरूर लिखे।

अब इस event के होने से methane जो कि एक greenhouse gas थी और वातावरण को गर्म रखती थी वो खत्म होने लग गयी। उस समय हमारे सूरज की रौशनी भी आज से काफी कम थी और वह पृथ्वी को गर्म रखने के लिए काफी नही थी, जिससे वातावरण ठंडा होने लग गया और वो धीरे-धीरे करके इतना ठंडा हो गया कि हर तरफ बर्फ जमने लगी और इसके फलस्वरूप हुरोनियन हिमयुग(iceage) की शुरुआत हुई।

इस समय हमारे सागर और जमीन सब कुछ जम गया था।इस बदलते हुए तापमान और बढ़ती हुई ऑक्सीजन को उस समय के जीव झेल नही पाये क्योंकि वो anaerobic respiration करते थे और उनके लिए ऑक्सीजन एक विष के समान थी जैसेकि हमारे लिए कार्बन-डाइऑक्साइड है।जिसको बहुत से जीव संभाल नही पाये और इससे बहुत बड़ी मात्रा मे उनकी जान गई।इन जीवो के मरने के बाद एक नए प्रकार के जीवों का उदय हुआ।ऐसे जीव जो aerobic respiration करते थे जिसके अर्थ ये कि वह ऑक्सीजन का इस्तेमाल करके साँस लेते थे जैसे कि हम लेते है।फिर इन्ही सुक्ष्म जीवो के विकास ने आज की दुनिया की नींव रखी।

हालाँकि अगर आप समय यात्रा करके उस समय मे जाकर देखो तो आपको कोई जीव मरता दिखाई नही देगा क्योंकि वो सभी जीव सूक्ष्म unicellular organisms थे अर्थात वे सिर्फ एक ही cell(कोशिका) से बने थे। जिन्हें आम आँखों से देखना असम्भव है और उनमें से भी ज्यादातर तो महासागरों मे ही रहते थे,वो महासागर जो अब glaciers बन चुके थे। इस समय हमारी पृथ्वी पर इतनी बर्फ थी कि इसे अगर अन्तरिक्ष से देखा जाता तो ये मात्र एक बड़ी सी सफ़ेद बर्फ की बॉल(ball) लगती।इसीलिए इसको snowball earth भी बोला जाता है।

Earth at huronian ice age
Credit – NASA

फिर पृथ्वी इसी तरह से 30 करोड़ सालो तक रही जिसके बाद पृथ्वी पर वापस कुछ दिलचस्प होने लगे जिससे जानने के लिए आप वेबसाइट की notification चालू करले ताकि जब हम उसपर आर्टिकल लिखे तो आपको पता चल जाऐ।

तो आज हमारे अस्तित्व मे एक बहुत बड़ा हाथ इस huronian iceage का भी है।आज इस हिमयुग कहानियाँ, उस वातावरण का बदलना,उन जीवो का मरना, एक नए प्रकार के जीवों का अस्तित्व मे आना,पृथ्वी का बर्फ से जमना।यह सब कुछ पृथ्वी मे कही खो गया है।मगर हम इसको हमेशा खोजते रहंगे और जानते रहेंगे हमारी पृथ्वी का बीता कल जिससे हम आने वाले कल के बारे मे जान सके।
आपको अगर यह आर्टिकल अछा लगे तो अपने दोस्तों मे शेयर करे और pangea पर भी हमारा आर्टिकल यह क्लिक करके पड़े।कहानी अभी खत्म नही हुई है क्योंकि ये तो बस शुरुआत है।
जय हिंद!

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