चाँद का निर्माण कैसे हुआ? How moon was formed?

2550

नमस्कार दोस्तों, हमारे चांद (Moon) को देखकर आपके मन में कई बार यह सवाल आता होगा कि आखिर इसका निर्माण कैसे हुआ।ये यूं ही बन गया या फिर इसके पीछे भी कोई कहानी है। तो आइए जानते है इस बारे मे।

अनुक्रम

चाँद का रहस्य

आसमान मे रात को चांदिनी बिखेरते चाँद के पीछे भी कई राज है। जब 24 जुलाई, 1969 मे apollo mission के जरिये चाँद की मिट्टी के कुछ सैंपल लाये गये तो उनमें पाया गया कि चाँद और पृथ्वी की मिट्टी बिलकुल ही समान है। 

चाँद की मिट्टी मे भी वही सब एलिमेंट्स थे जो कि पृथ्वी की मिट्टी मे है। हालांकि इसका मतलब यह नही है कि चाँद की मिट्टी मे भी जीवन है। मगर बस इतना है कि चाँद और पृथ्वी दोनों ही सामान चीज़ों से मिलकर बनी है। ये बिलकुल ऐसे है जैसे कोई जुड़वाँ बच्चे। मगर बस चाँद का घनत्व पृथ्वी के मुकाबले थोड़ा कम है और वो वजन और क्षेत्रफल मे भी पृथ्वी से कम है। 

इस खोज के बाद सबसे पुरानी और प्रचलित Giant Impact Hypothesis गलत साबित होगयी थी। इस थ्योरी और बाकी सभी थ्योरी के बारे मे हम आगे पड़ेंगे।

Giant Impact Hypothesis (भीमकाय टक्कर परिकल्पना)

इस थ्योरी के अनुसार पृथ्वी जब अपने पहले दिनों में थी तब हमारे सौरमंडल में उथल-पुथल मची हुई थी। कई छोटे-छोटे ग्रह बन रहे थे और एक दूसरे से टकरा रहे थे। उस समय हमारे सौर मंडल मे लगभग 19 ग्रह हुआ करते थे। उसी वक़्त कोई पृथ्वी से आधा (आज के मंगल ग्रह जितना बड़ा) ग्रह, पृथ्वी से आकर टकरा गया। इस ग्रह को वैज्ञानिक theia बुलाते है। 

इसके पृथ्वी के टकराने से पृथ्वी पर बहुत बड़ा धमाका हुआ और पृथ्वी की ऊपरी सतह पूरी तरह उड़कर अंतरिक्ष मे पहुच गयी। अब पृथ्वी और theia के टुकड़े और धुल गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी का चक्कर लगाने लगे गयी। और बाद मे इसी धुल और टुकड़ो के इकट्ठे होने से चाँद का निर्माण हुआ। 

अब ये कहानी सुनने मे थोड़ी रामंचक और सच्ची लगती है। 

मगर इसमें एक बहुत बड़ी खामी है। इसके हिसाब से चाँद को 60% पृथ्वी जैसा और 40% उस theia ग्रह जैसा होना चाहिए था। मगर हकीकत क्या है वो हम ऊपर जान चुके है। 

इसलिए इस थ्योरी को कुछ वैज्ञानिक सिरे से निकार देते है। जबकि कुछ वैज्ञानिको के हिसाब से यह भी सम्भावना है कि theia ग्रह बिलकुल पृथ्वी जैसा हो इसलिये चाँद और पृथ्वी एक जैसे है।मगर न ही इसका कोई सबूत है और न ये सुनने मे इतनी सही लगती है। क्योंकि दो ग्रहों का बिलकुल सामान होना एक बहुत ही दुर्लभ बात है। 

कुछ वैज्ञानिक यह भी कहते है कि पृथ्वी से कोई बहुत बड़ा ग्रह नही बल्कि कुछ छोटे-छोटे एस्टेरोइड जैसे पिंड टकराये थे जिनसे पृथ्वी का कुछ हिस्सा अंतरिक्ष मे चला गया और चाँद बन गया। हालांकि इस थ्योरी को सही साबित करने के लिए भी सबूतों की कमी है क्योंकि कई सबूत यह दर्शाते है कि पृथ्वी का किसी बड़ी चीज से टकराव तो हुआ था। 

अब आपको क्या लगता है, आप हमें कमेंट करके बताएं।

moon formation
moon formation

Moon Co-formation Theory

इस थ्योरी के अनुसार पृथ्वी और चांद का निर्माण साथ साथ हुआ था। इसी कारण से दोनों बिल्कुल एक जैसे हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा होने की काफी संभावना है क्योंकि और कई ग्रहों के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

मगर अगर ऐसा है तो पृथ्वी और चांद का घनत्व भी सम्मान होना चाहिए। लेकिन आपको आर्टिकल में पहले ही बता चुका हूं कि चांद(Moon) का घनत्व पृथ्वी से काफी कम है। यह सवाल स्टोरी को सवालों के कटघरे में खड़ा कर देता है। और इस थ्योरी को गलत साबित करने वाले सबूत इसको सही साबित करने वाले सबूतों से ज्यादा है। तो जब तक इस थ्योरी के पक्ष मे हमको कोई थ्योरी नही मिलती। तब तक हम इसको सही नही मान सकते। 

इसके अलावा एक थ्योरी यह भी है कि, दो ऐसे ग्रह जो मंगल ग्रह से भी 5 गुना बड़े थे,वे आपस में टकरा गए। आपस में टकराने के बाद वह वापस दो ऑब्जेक्ट्स में बट गए और फिर एक दूसरे का चक्कर लगाते-लगाते वह दोबारा आपस में टकरा गए। तो इस तरह 2 बार टकराने के कारण,दोनों बिल्कुल एक जैसे हो गए लेकिन चूंकि वे दो बार टकराए हैं इसलिए उनमें से एक की तरफ ज्यादातर mass आ गया और उसका घनत्व भी ज्यादा हो गया और दूसरे की तरफ कम mass गया और उसका घनत्व भी कम रह गया। इस तरह हमारे चांद और पृथ्वी का निर्माण हुआ। चलिये अब रुख करते है आज की सबसे मजेदार थ्योरी की तरफ़।

Synestia Hypothesis- The Unproven Hypothesis( एक अप्रमाणित परिकल्पना)

यह परिकल्पना एक “भीमकाय टक्कर परिकल्पना” का बहतर रूप है। यह अपने आप मे बिलकुल ही रोमांचक, अनसुनी और अनोखी परिकल्पना है। इसको आप अपने दोस्तों को सुनाकर उनको अचंभित कर सकते है।

इसके अनुसार जब theia हमारी पृथ्वी से टकराया तब पृथ्वी का लगभग पूरा हिस्सा अंतरिक्ष मे उड़ गया और उसके बाद पृथ्वी कुछ कुछ ब्रहस्पति ग्रह जैसी दिखने लगी। वह ब्रहस्पति जितनी विशाल थी मगर उसकी कोई सतह नही थी। इसको वैज्ञानिक भाषा मे synestia बोलते है(जब धुल के बड़े बड़े बादल तेज़ी से घूमते है और वह एक doughnut के आकार मे होते है।

 इसी synestia की परतों के अंदर हुमारा चाँद भी चक्कर काट रहा था। इसके बाद धीरे धीरे synestia सिकुड़ने लगा और आज की हमारी पृथ्वी जैसा होगया। और चुकी चाँद भी इस synestia के अंदर ही बना था इसलिए वह भी बिलकुल पृथ्वी जैसा था। 

यह परिकल्पना वैज्ञानिको के सभी सवालों के जवाब एक बहतर ढंग से दे देती है। मगर यह अप्रमाणित है और इसके पक्ष मे कोई सबूत नही है। 

Read Also : Mars Spacesuit की टेस्टिंग हो रही है मंगल ग्रह पर

Conclusion

अब इनमें से कौन सी कहानी सही है यह तो हम लोग नहीं जानते मगर भविष्य मे मिलने वाले सबूत शायद इस राज़ से पर्दा उठा पाए। 

आज के समय मे वैज्ञानिकों के बीच Moon giant impact hypothesis ही ज्यादा प्रचलित है क्योंकि यह ज्यादातर सवालों के जवाब दे देती है। आपको इनमें से कौन सी सही लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताये। अगर आपको आर्टिकल पसंद आया हो और कुछ नया जानने को मिला हो तो हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन ऑन कर ले। आप अंतरिक्ष टैग के अंदर हमारे दूसरे आर्टिकल भी पड़ सकते है। 

आपसे मुलाकात होगी अगले किसी रोमांचक टॉपिक के साथ। तब तक के लिए जय हिंद।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here