प्रकृति के चार मूलभूत बल(4 fundamental forces of nature)

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Fundamental forces : नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब? दोस्तों इस प्रकृति के बारे में जानना सभी को पसंद होता है। प्रकृति कैसे काम करती है इसकी पढ़ाई करने के लिए हम विज्ञान की जिस शाखा का उपयोग करते हैं उसे physics यानी कि भौतिक विज्ञान कहा जाता है। प्रकृति को सही ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके कई नियमों और सिद्धांतों की खोज की है। आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि वह कौन से मूलभूत बल (fundamental forces) हैं जो कि इस प्रकृति में लागू होते हैं।

सबसे पहले तो आईये जानते हैं कि बल (force) क्या है?

अनुक्रम

बल क्या है?

बल वह भौतिक कारक है जो कि किसी भी वस्तु की अवस्था में परिवर्तन लाता है अगर कोई वस्तु विरामावस्था(rest) में है और उस पर बल लगाया जाए तो वह गतिशील हो जाएगी और अगर कोई वस्तु गति कर रही है और उस पर बल लगाया जाए तो उसकी गति में परिवर्तन आएगा आसान भाषा में कहा जाए तो बल वह कारक है जो कि किसी वस्तु में त्वरण पैदा करता है। इसके दो मात्रक होते हैं न्यूटन और डाईन।1 Newton= 10^5 dyne किसी वस्तु पर लगने वाला बल उस वस्तु के द्रव्यमान(mass) और उस वस्तु में उत्पन्न त्वरण(acceleration)  के गुणनफल के बराबर होता है। मतलब कि F=ma

कुछ ऐसे मूलभूत बल हैं जो कि इस प्रकृति में काम करते हैं, जिनकी वजह से इस प्रकृति में संतुलन बना हुआ है उनके बारे में हम इस आर्टिकल में जानेंगेइस प्रकृति में कुल चाल 4 मूलभूत बल काम करते हैं 1. गुरुत्वीय बल(gravitational force)2. विद्युतचुंबकीय बल( electromagnetic force) 3. नाभिकीय बल(strong nuclear force) 4. कमजोर नाभिकीय बल(weak nuclear force) यहां पर हमने सभी मूलभूत बलों की संक्षिप्त में जानकारी दी है।

गुरुत्वीय बल(Gravitational fundamental forces)

गुरुत्वीय बल (Gravitational force) गुरुत्वाकर्षण बल कोई भी दो ऑब्जेक्ट के बीच लगने वाला एक अट्रैक्शन है इस ब्रह्मांड में हर एक ऑब्जेक्ट के बीच यह बल लगता है किसी पेड़ से कोई फल अगर जमीन पर गिरता है तो वह प्रथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण गिरता है, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही चंद्रमा धरती के चारों ओर चक्कर लगाता है, सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से सभी ग्रह इसका चक्कर लगाते हैं।इस बल की एक खास विशेषता यह है कि इसका प्रभाव बहुत लंबी दूरी तक पर भी हो सकता है। जैसे सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पृथ्वी तक लगता है जो कि एक बहुत लंबी दूरी है।

fundamental forces
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विद्युतचुंबकीय बल(electromagnetic fundamental forces)

यह बल दो आवेशित कणों( charged particles) के बीच लगता है।कणों में मुख्य रूप से दो चार्ज होते हैं धनात्मक(positive)  जिसको + से दर्शाया जाता है और एक होता है ऋणात्मक(negative) जिसे कि – से दर्शाया जाता है।

अगर एक धनात्मक और एक ऋणात्मक चार्ज पार्टिकल होंगे तो एक दूसरे की तरफ आकर्षित होंगे और अगर दोनों चार्ज समान होंगे तो वह एक दूसरे से दूर भागेंगे।

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नाभिकीय बल (strong nuclear fundamental forces)

यह बल एक नाभिक (nucleus) के भीतर होता है। नाभिक के भीतर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं और इन सभी में पॉजिटिव चार्ज होता है अगर पॉजिटिव चार्ज है तो यह बात तो तय है कि यह कण एक दूसरे के प्रति  प्रतिकर्षित होंगे तो इन प्रतिकर्षित हो रहे कणों को नाभिक के अंदर बांधे रखने के लिए दो पॉजिटिव चार्ज पार्टिकल के बीच एक बल काम करता है इसे ही शक्तिशाली नाभिकीय बल कहा जाता है।यह बल दो प्रोटॉन के बीच भी लगता है और दोनों न्यूट्रॉन के बीच भी। और यह बल एक न्यूट्रॉन और एक प्रोटोन के बीच भी लगता है। यह बल एक बहुत ही छोटी दूरी तक काम करता है यह बल 10^-15m की दूरी पर लगता है।

कमजोर नाभिकीय बल(weak nuclear fundamental forces)

कमजोर नाभिकीय बल
यह फोर्स भी एक बहुत ही छोटी डिस्टेंस पर काम करता है और यह फोर्स किसी एटम का रूप बदल कर रख सकता है मतलब की एक पार्टिकल का रूप पूरी तरह से बदल सकता है ये  न्यूट्रॉन को प्रोटॉन में बदल सकता हैं और प्रोटॉन को न्यूट्रॉन में बदल सकता हैं।
इस फोर्स के बारे में हम आने वाले आर्टिकल्स में विस्तार से जानेंगे आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं अगली पोस्ट में।