What is SLV, PSLV and GSLV (Indian Launch vehicle technology)

2349

नमस्कार दोस्तों मैं अंकुर श्रीवास्तव हाजिर हूं एक और नये आर्टिकल के साथ।
दोस्तों पूरी दुनिया अंतरिक्ष की तरफ तेजी से अपने कदम बढ़ा रही है। अंतरिक्ष की इस दोड़ में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉसमॉस फिलहाल सबसे आगे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में हमारे देश भारत की स्पेस एजेंसी इसरो पूरी दुनिया में तारीफें बटोर रही है। इसरो बहुत ही कम समय और कम खर्च में ही ऐसे ऐसे मिशंस को अंजाम दे चुकी है जिससे सभी भारतीयों का सर गर्व से ऊंचा हुआ है।
दोस्तों कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी कितनी सफल है यह इस चीज पर निर्भर करता है कि उस एजेंसी के पास कैसी प्रक्षेपण यान(Launch vehicle) तकनीक है। आइए जानते हैं कि प्रक्षेपण यान (launch vehicle? क्या होता है? और भारत के पास कैसी लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी है?

अनुक्रम

क्या होता है लॉन्च व्हीकल(what is launch vehicle)


लॉन्च व्हीकल का सीधा साधा मतलब होता है वह वाहन या व्हीकल जिससे किसी भी तरह के पेलोड को अंतरिक्ष में ले जाया जाता है।
अगर हमें किसी सैटेलाइट को सतह से पृथ्वी की कक्षा या फिर उससे भी आगे तक भेजना हो तो हम लॉन्च व्हीकल्स का प्रयोग करते हैं।
दुनिया की कई स्पेस एजेंसीज के पास अपने लॉन्च व्हीकल होते हैं और उन्हीं से वे अपने सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजते हैं लेकिन कुछ देश ऐसे होते हैं जिनकी स्पेस एजेंसीज के पास अपना खुद का लॉन्च व्हीकल नहीं होता तो वह दूसरे देशों की मदद लेते हैं। हमारे भारत के पास अपने खुद के बहुत अच्छे लॉन्च व्हीकल हैं।

भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने कई अच्छे लॉन्च व्हीकल्स का निर्माण किया है जैसे SLV, PSLV, GSLV आदि और इन्हीं के द्वारा भारत अपने कई बड़े मिशंस को अंजाम देता है।
भारत के लॉन्च व्हीकल कुछ इस प्रकार है।

SLV (satellite launch vehicle)


एसएलवी मतलब सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल इसको 1970 के दशक में शुरू किया गया था।
उस समय भारत में अंतरिक्ष विज्ञान को इतना सीरियसली नहीं लिया जाता था लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष विज्ञान का महत्व पता था, उनको यह पता था कि भविष्य में सभी देशों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान की दौड़ शुरू होगी और भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना पड़ेगा इसलिए सन 1970 में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की अध्यक्षता में एसएलवी परियोजना पर काम शुरू हुआ। एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर 1979 में slv-3 की पहली उड़ान हुई पर वो असफल रही। इसके बाद 18 जुलाई 1980 को फिर से इसका परीक्षण किया गया जो कि सफल रहा। इस परीक्षण ने भारत को स्पेस क्लब का सदस्य बना दिया (अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस, जापान के बाद भारत छटवा देश)।
एसएलवी पृथ्वी से 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक 40 किलो वजन तक के पेलोड को स्थापित कर सकता है। एसएलवी की ऊंचाई करीब 22 मीटर(72 फीट) है और उसका द्रव्यमान करीब 17000 किलोग्राम है। SLV के द्वारा अब तक कुल 4 लॉन्च किए जा चुके हैं जिनमें से दो सफल रहे हैं, एक असफल रहा है और एक आंशिक सफल रहा है। SLV रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में लांच कर चुका है।

PSLV(poler satellite launch vehicle)


पीएसएलवी मतलब पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल भारत के इस लॉन्च व्हीकल को इसरो द्वारा तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य 1200 किलोग्राम तक के वजन वाले सैटेलाइट को पृथ्वी से 900 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करना था।

पीएसएलवी 4 चरणों वाला लॉन्च व्हीकल है। इसके पहले और तीसरे चरण में ठोस प्रणोदक(solid propellants) का उपयोग किया जाता है और दूसरे और चौथे चरण में द्रव प्रणोदक(liquid propellants) का प्रयोग किया जाता है। प्रणोदक का मतलब होता है रॉकेट में उपयोग किया जाने वाला इंधन।
पीएसएलवी की ऊंचाई 44 मीटर (144 फीट है) और इसका व्यास करीब 2.8 मीटर है। इसके द्वारा अब तक 37 लांच किये जा चुके है जिसमें से 35 सफल रहे हैं। चंद्रयान 1 और मंगलयान जैसे मिशन्स को भी इसी से अंजाम दिया गया था। पीएसएलवी से अब तक मुख्य रूप से निम्न उपग्रह लांच किए जा चुके।

GSLV( Geostationary or Geosynchronous Satellite launch vehicle)


जीएसएलवी मतलब है जियोसिंक्रोनस सैटलाइट लॉन्च व्हीकल। यह एक बहुत ही शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है।

यह एक तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसके प्रथम चरण में ठोस प्रणोदक(Solid propellants) और द्वितीय चरण में द्रव प्रणोदक((liquid propellants) तथा तृतीय चरण में क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया गया है। GSLV 2 टन से भी ज्यादा भार के उपग्रह को भी पृथ्वी से 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भूस्थिर कक्षा में स्थापित कर सकता है। जीएसएलवी की ऊंचाई करीब 49.13 मीटर(161 फीट) है और इसका व्यास करीब 2.8 मीटर है। दुनिया में 50% से ज्यादा सेटेलाइट का वजन 2 टन से ज्यादा होता है जीएसएलवी ऐसे 3 सैटेलाइट को एक साथ अंतरिक्ष में ले जाकर पृथ्वी की भूस्थिर कक्षा में स्थापित कर सकता है।

अभी तक इसरो के पास मुख्य रूप से यह लॉन्च व्हीकल थे लेकिन इसरो के वैज्ञानिक और इंजीनियर लगातार और भी ज्यादा एडवांस launch vehicle बनाने में लगे हुए हैं।

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने भारतीय प्रक्षेपण यान तकनीक के बारे में जाना।
उम्मीद है आप को ये आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर कीजिए।
मैं अंकुर श्रीवास्तव मिलता हूं आपको बहुत जल्द एक नए आर्टिकल के साथ तब तक के लिए नमस्कार।