5 सबसे महान भारतीय वैज्ञानिक।

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नमस्कार दोस्तों मैं अंकुर श्रीवास्तव हाजिर हूं एक और नये आर्टिकल के साथ दोस्तों हमारे भारत में कई महान हस्तियों ने जन्म लिया है जिन्हें हम आज भी याद रखते हैं।
इसके अलावा भारत में हमेशा से ही महान वैज्ञानिक भी जन्म लेते रहे हैं फिर चाहे वह प्राचीन भारत हो या आधुनिक भारत। आज के इस आर्टिकल में मैं आपको आधुनिक भारत के सबसे महान वैज्ञानिकों के बारे में बताऊंगा जिन्होंने भारत का नाम पूरे विश्व में ऊंचा किया है।

अनुक्रम

1.चन्द्रशेखर वैंकट रमन


ये वो व्यक्ति हैं जिन्होंने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किया है। चंद्रशेखर वेंकटरमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नामक स्थान पर हुआ था उनके पिता चंद्रशेखर अय्यर एक कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर थे।

Dr. C.V. Raman


4 वर्ष की आयु में रमन अपने परिवार के साथ विशाखापट्टनम चले गए उनकी प्रारंभिक शिक्षा विशाखापट्टनम में ही हुई।
रमन की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 12 वर्ष की उम्र में ही मैट्रिक परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद उनके पिता उनको आगे की पढ़ाई के लिए विदेश भेजना चाहते थे पर स्वास्थ्य खराब होने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया उन्हें भारत में ही रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। उस समय भारत में वैज्ञानिक बनने की कोई सुविधा नहीं थी इस कारण से अपनी शिक्षा पूरी होने पर रमन अकाउंटेंट जनरल के पद पर नियुक्त होकर कोलकाता चले गये।
एक दिन वे कार्यालय से वापस अपने घर लौट रहे थे तभी उनकी नजर एक साईन बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा था ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’। रमन वहां गये और अपना परिचय दिया और वहां की प्रयोगशाला में प्रयोग करने की आज्ञा प्राप्त कर ली। वहां पर उन्होंने भौतिकी के कई प्रयोग किए।
सन 1917 में वे कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर बने। इस विश्वविद्यालय में उन्होंने प्रकाश से जुड़े कई शोध किए।
रमन ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण खोजें की। उनका पहला शोधपत्र 1906 में लंदन की फिलोसोफिकल मैग्जीन में प्रकाशित हुआ यह शोध पत्र प्रकाश विवर्तन के बारे में था।
एक बार जब वे समुद्री मार्ग से होते हुए ऑक्सफोर्ड से वापस इंडिया लौट रहे थे तब उन्होंने समुद्र में नीले जल को पाया तो उनके मन में यह सवाल उठा कि समुद्र का पानी नीला ही क्यों होता है। कोलकाता विश्वविद्यालय वापस आकर उन्होंने इस पर शोध किया और 7 सालों के शोध कार्य के बाद वो अपनी इस खोज पर पहुंचे जिसमें उन्होंने परावर्तनशील वस्तुओं में प्रकाश के फैलने की बात की थी उनकी इस खोज को रमन प्रभाव कहा जाता है। 1930 में उन्हें इस खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया रमन प्रभाव की खोज 28 फरवरी को हुई जिसकी याद में पूरे भारत में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

2. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम


भारत के मिसाइल मैन के नाम से विख्यात अब्दुल कलाम सर वह व्यक्ति हैं जिन्हे भारत के अधिकांश युवा अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।

Dr. A.P.J. Abdul Kalam

15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के धनुषकोडी नामक गांव में एक मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ था उनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम था उनका परिवार एक मध्यमवर्गीय परिवार था उनके पिता मछुआरों को नाव किराए पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के लिए अखबार वितरित करने का भी कार्य किया है। 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में डिग्री हासिल की इसके बाद उन्होंने ‘भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास परिषद’ में काम करना शुरू किया। 1962 में उन्होंने इसरो के लिए काम करना शुरू किया वहां मिशन डायरेक्टर के रूप में इन्होंने पहले स्वदेशी प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब्दुल कलाम ने ‘अग्नि’ और ‘पृथ्वी’ नामक मिसाईल्स का भी निर्माण किया। इसीलिये उनको भारत का मिसाईल मैन कहा जाता है।
उनके विचार आज भी भारत की युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

3. डॉ. जे सी बसु


भारत के वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु वह व्यक्ति हैं जिन्होंने पेड़ पौधों में भी जीवन होने की बात कही थी। उनका जन्म 30 नवंबर 1858 को बंगाल में ढाका जिले के निकट हुआ था उनके पिता भगवान चंद्र बसु ब्रह्म समाज के नेता थे। डॉक्टर जेसी बसु एक वैज्ञानिक के साथ-साथ एक पुरातात्विक, लेखक और बहुतशास्त्री ज्ञानी भी थे।
वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगो की प्रकाशिकी पर कार्य किया। उन्होंने वनस्पति विज्ञान में भी कई महत्वपूर्ण खोजें की।
वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने ‘वृक्षो में जीव’ नामक ग्रंथ के माध्यम से दुनिया को यह बताया कि पेड़ पौधों में भी जीवन हो सकता है। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता भी कहा जाता है।

4.सुब्रमण्यम चंद्रशेखर


सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एक महान खगोलविज्ञानी के रूप में देखा जाता है। उनका जन्म 19 अक्टूबर 1910 में हुआ था। 18 साल की उम्र में ही उनका पहला शोध पत्र इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स में प्रकाशित हुआ। खगोल विज्ञान में अपनी खोज ‘चंद्रशेखर लिमिट’ के लिए वह पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। उनकी खोजों से ही वैज्ञानिकों ने न्यूट्रॉन स्टार और ब्लैक होल को समझने में सफलता मिली भौतिक शास्त्र में उनके शोध के लिए 1983 में उन्हें विलियम फाउलर के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया

5. डॉ.सत्येंद्र नाथ बोस


आधुनिक भौतिकी के क्षेत्र में सत्येंद्र नाथ बोस का नाम हमेशा अमर रहेगा। उनका जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा उनके घर के पास एक साधारण स्कूल में हुई।

Dr. satyendranaath bose

डॉक्टर सत्येंद्र नाथ बोस ने अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ मिलकर काफी शोध कार्य किया। उन्होंने बोस आइंस्टाइन स्टैटिक्स की खोज की और उन्होंने क्वांटम फिजिक्स को भी एक नई दिशा दी। बोसोन पार्टिकल्स का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है।

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने भारत के कुछ महान वैज्ञानिकों के बारे में बात की उम्मीद है आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा।
अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजिए मैं अंकुर श्रीवास्तव मिलता हूं आपको बहुत जल्द एक नए आर्टिकल के साथ तब तक के लिए नमस्कार।