जानिए रावण के 10 सिर क्यों थे| Ravana’s 10 Faces

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लोकडाउन के चलते सभी भारतवासी घर में बैठकर रामायण का लुफ्त उठा रहे हैं और रामायण की सीख ले रहे हैं क्योंकि यह माना जाता है कि जिसने भी रामायण अच्छे से देख ली वह एक अच्छा इंसान जरूर बन जाता है। मैं तो यही कहूंगा कि अगर आप ने रामायण अभी तक नहीं देखी है तो प्लीज जा कर देखिए लेकिन इसी बीच रामायण देखते-देखते बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आ रहा था। कि रावण (Ravana) के 10 सिर क्यों होते हैं आखिर उसको यह सिर कैसे मिले क्या उसने कोई यज्ञ किया था या फिर कोई ऐसी शिक्षा ली थी जिसकी वजह से रावण के 10 सिर हो गए।

अनुक्रम

रावण के दस सर क्यों (Ravana’s 10 faces)

दोस्तों जानकारी जुटाने के बाद और पौराणिक किताबों के अनुसार यह माना जाता है कि रावण के जो यह 10 सिर हैं वह बुराइयों के प्रतीक हैं जिनमें  द्वेष, घृणा पक्षपात, अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह, व्यभिचार, धोखा यह सभी शामिल है रावण “महर्षि विश्वा” और केकशी नामक राक्षसी के पुत्र थे और रावण को अपने पिता महर्षि विश्वा से  वेद शास्त्रों का ज्ञान मिला था और उनकी माता से राक्षसी प्रवृत्ति मिली थी। जिस रावण को आज भी सभी लोग बुराई का प्रतीक मानते हैं और हर दशहरा को उनकी मूर्ति में आग लगाते हैं यह सोचकर कि वह बुराइयों का अंत कर रहे हैं।

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तर्क यह भी है।

दोस्तों रावण (Ravana) के 10 सिर थे। यह कहना सत्य नहीं होगा क्योंकि कुछ विद्वानों का मानना है कि रावण के 10 सिर नहीं थे, किंतु वे 10 सिर होने का भ्रम वह पैदा कर देता था यानी कि दूसरे व्यक्तियों को उसके 10 सिर ही दिखाई देते थे। लेकिन असल में उसका एक ही सर था।

शायद उसके पास ऐसी कोई शक्ति थी जिसकी वजह से उसके 10 सिर दिखाई देते थे, जिस वजह से लोग उसे दशानन कहने लगे थे, कुछ विद्वानों के अनुसार रावण छह दर्शन और चारों वेद का ज्ञाता था इसीलिए उसे “दसकंठी” भी कहा जाता था। 10 दसकंठी कहे जाने के कारण प्रचलन में उसके 10 सिर मान लिए गए थे। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार 9 मडिया होती थी। उक्त में नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था। जिसके कारण उसके 10 सिर होने का भ्रम पैदा होता था। लेकिन विद्वान और पौराणिक कथाओं के अनुसार तो यही सच माना जाता है कि रावण एक मायावी व्यक्ति था जो अपनी माया के अनुसार 10 सिर होने का भ्रम पैदा कर सकता था उसकी मायावी शक्ति और जादू के चर्चे आज पूरे वर्ल्ड में जाने जाते हैं।

 रावण कौन था (Who was ravana)

अभी बहुत से ऐसे लोग होंगे जो रावण (Ravana) के बारे में नहीं जानते होंगे तो जान लो कि रावण रामायण का एक प्रमुख प्रति चरित्र था रावण लंका का राजा था। वह अपने 10 सिरों के कारण जाना जाता था। जिसके कारण उसका नाम दशानन पड़ा था। रावण में बहुत से ऐसे गुण थे। जिसकी वजह से वह विशेष था। रावण की पत्नी मंदोदरी थी और उनके बच्चे मेघनाथ थे और उनकी एक बहन भी थी जिसका नाम सुपनखा था और उनके तीन भाई थे कुंभकरण, कुबेर, विभीषण, थे। बात यह थी कि सुपनखा की नाक भगवान राम ने काट दी थी जिसकी वजह से पूरी रामायण शुरू हुई और अपनी बहन का बदला लेने के लिए रावण ने भगवान राम से युद्ध करने का फैसला लिया रावण एक ऐसा व्यक्ति था, उस समय का जिसे कोई भी नहीं मार सकता था क्योंकि उसका पूरा शरीर अमर था बस केवल उसकी नाभि को छोड़कर। उसकी कमियां थी जिसकी वजह से वह मर सकता था। अगर उसकी नाभि में तीर मार दिया जाए। और उन कमियों को उनका भाई विभीषण जानता था। जो राम के साथ मिलकर अपने भाई की मृत्यु का कारण बना अगर रावण अपनी मृत्यु का राज विभीषण को नहीं बताता तो आज रावण जिंदा होता और उसके विचार भी क्योंकि वह चाहता था कि चंद्रमा तक सीढ़ियां बनाना जो कार्य उसने शुरू भी कर दिया था शायद आज वह कंप्लीट हो जाता और हम सभी चंद्रमा पर सीढ़ियों से जा पाते।

रावण का हवा में उड़ने वाला विमान

रामायण देखते वक्त आप सभी के मन में यह सवाल भी उठ रहा था कि क्या रावण के पास सही में एक हवा में उड़ने वाला विमान था जो कि रामायण में दिखाया जा रहा है जिसको जानने के लिए कुछ लोग गूगल पर आए और सर्च कर रहे हैं |

रावण (Ravana) ने कुबेर को लंका से हटाकर वहां खुद का राज्य कायम किया था। कुबेर रावण का भाई था और धनपति कुबेर के पास पुष्पक विमान था। जिसे रावण ने छीन लिया था रावण ने इस पुष्पक विमान में प्रयोग होने वाले इंधन से संबंधित जानकारियों पर मद्रास के ललित कला अकादमी के सहयोग से भारत अनुसंधान केंद्र द्वारा बड़े पैमाने पर शोध कार्य किया था। जो आज भी किया जा रहा है हमारे साइंटिस्ट के द्वारा। पुष्पक विमान जो रावण के पास था  जोकि कुबेर से छीना गया था उसी विमान में सीता का अपहरण किया गया था। और उसी में सीता को लंका में ले जाया गया था।रामायण में वर्णित है कि युद्ध के बाद श्री राम सीता लक्ष्मण तथा उन लोगों के साथ दक्षिण में स्थित लंका से अयोध्या पुष्पक विमान द्वारा आए थे। पुष्पक विमान को रावण ने अपनी भाई धनपति कुबेर से बलपूर्वक हासिल किया था। पुष्पक विमान का प्रारूप एक निर्मित विधि महर्षि अंगिरा ने बनया था और इसका निर्माण डिजाइन और कार्य क्षमता को भगवान विश्वकर्मा ने निर्मित किया था इस अद्भुत रचना के कारण ही वह शिल्पी कह लाए थे। पुष्पक विमान की विशेषता के बारे में अगर बात करें तो पुष्पक विमान विशेषता थी कि वह छोटा या बड़ा किया जा सकता था जी हां पुष्पक विमान में इच्छा अनुसार गति होती थी और बहुत से लोगों को यात्रा करवाने की क्षमता थी यह विमान आकाश में स्वामी की इच्छा अनुसार भ्रमण कर सकता था। अर्थात उसमें मन की गति से चलने की क्षमता थी जो कि आज की साइंस भी उसके इस तर्क को नहीं समझ पाई है और ना ही आज ऐसी कोई चीज बनी है जो की इच्छा के अनुसार भ्रमण कर सके। 

श्रीलंका में श्री रामायण रिसर्च कमेटी के अनुसार रावण के चार हवाई अड्डे थे। उषानगोंडा,  गुरुलोपोथा, वारियापोला और तोतुपोलाकंदा  इन चार में से एक उषानगोंडा हवाई अड्डा नष्ट हो गया है।  श्रीलंका रामायण कमेटी के अनुसार सीता की तलाश में जब हनुमान लंका पहुंचे तो लंका दहन में रावण का उषानगोंडा हवाई अड्डा नष्ट हो गया था। रिसर्च कमेटी के चेयरमैन अशोक कैंथ ने बताया कि पिछले 4 साल की खोज में यह हवाई अड्डे पाए गए हैं और जैसे ही कोई जानकारी मिलती है वह जल्दी ही सूचित करेंगे।

पिछले जन्म में रावण और कुम्भकर्ण कौन थे?

त्रेता काल के दौरान अपने दूसरे जीवन में, रावण ( जया ) और कुंभकर्ण (विजय) के रूप में पैदा हुए थे, और दोनों ही राम द्वारा मारे गए थे।
द्वापर काल के दौरान अपने तीसरे जीवन में, रावण शिशुपाल (जया) और कुंभकर्ण दंतवक्र (विजय) के रूप में पैदा हुए थे और दोनों ही इस बार कृष्ण द्वारा मारे गए थे।

रावण कौन से धर्म को मानता था?

रावण गोंडी धर्म को मानता था लेकिन हिन्दू धर्म के देवताओं की पूजा करता था और एक जाना माना ब्राह्मण था लेकिन कुछ लोग मानते है की रावण हिन्दू था।

रावण कितने साल तक जीवित रहा था?

रावण 12,00,000 वर्ष से अधिक जीवित रहा।

रावण की Hight कितनी थी?

रावण की height विशेषज्ञों के अनुसार 18 फीट थी।

Ravana के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पढ़ सकते हैं
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