नई शिक्षा नीति 2020 क्या है?

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हाल ही में भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की है जिसमें नीचे बताई गई समस्याओं को हल करने का प्रयास किया गया है। भारत में 34 सालों में अब जाकर शिक्षा नीति को बदल कर नई शिक्षा नीति लागू की गई है । यह मोदी सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला है और इसका लगभग सभी भारतीयों की जीवन में प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसको जानना अति आवश्यक। इस आर्टिकल में हमने आपको नई शिक्षा नीति के बारे में जानकारी दी है।

भारत एक बहुत ही विशाल देश है जहां पर 135 करोड़ से भी ज्यादा जनसंख्या निवास करती है। इस जनसंख्या का एक बड़ा भाग युवा वर्ग है। किसी देश का युवा वर्ग ही उस देश का भविष्य होता है इसलिए जरूरी है कि उस देश के युवाओं को उनके बचपन से ही अच्छी शिक्षा मिले तभी वह अपना तथा देश का भविष्य उज्ज्वल बना पाएंगे।

भारत में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा निवास करते हैं तो यहां की शिक्षण व्यवस्था भी बहुत अच्छे स्तर की होनी चाहिए। परंतु भारत की शिक्षण व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है। इसमें न जाने कितने दोष हैं जैसे इस व्यवस्था में कौशल से ज्यादा अंकों को महत्व दिया जाता है, कुछ को छोड़कर लगभग सभी शिक्षण संस्थान रटने की व्यवस्था पर काम करते हैं, भारतीय शिक्षण व्यवस्था में भाषा एक बड़ी समस्या है।

अनुक्रम

क्या है नई शिक्षा नीति?

नई शिक्षा नीति के द्वारा सरकार ने भारतीय शिक्षण व्यवस्था में कई बदलाव किए हैं। आइए सबसे पहले तो हम जानते हैं कि इस नई शिक्षण व्यवस्था का ढांचा किस प्रकार होगा। अभी तक भारतीय शिक्षण व्यवस्था 10+2 के सिद्धांत पर काम करती थी। मतलब कि अब तक कक्षा 1 से 10 तक कक्षाएं होती थी और दसवीं कक्षा पास करने के बाद विद्यार्थी को एक स्ट्रीम(आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस) चुननी होती थी। उसी स्ट्रीम में 11वीं और 12वीं कक्षा पढ़नी होती थी लेकिन नई शिक्षा नीति में यह सब नहीं होगा। नई शिक्षण व्यवस्था 10+2 नहीं बल्कि 5+3+3+4 के सिद्धांत पर काम करेगी।

सबसे पहले 5 साल प्री प्राइमरी के 3 साल और कक्षा पहली व दूसरी को मिलाकर होंगे। इसके बाद कक्षा‌ 3, 4 और 5 को मिलाकर 3 साल होंगे। इसके बाद कक्षा 6, 7, 8 के 3 साल और अंततः 4 साल कक्षा 9वीं 10वीं 11वीं और 12वीं के 4 साल होंगे। इसके बाद कॉलेज लेवल की शिक्षा के लिए भी कई बदलाव किए गए जिनके बारे में हम आगे बात करेंगे।

आइए आप जानते हैं कि नई शिक्षण व्यवस्था की क्या-क्या विशेषताएं हैं।

मातृभाषा पर जोर देंना

नई शिक्षा नीति में यह बात महत्वपूर्ण है कि इसमें मातृभाषा पर जोर दिया गया है। यहां पर मातृभाषा का मतलब हिंदी ही नहीं बल्कि भारत के समस्त क्षेत्रों की समस्त भाषाओं से है। जैसे तमिलनाडु में रहने वाले छात्र की पढ़ाई तमिल में होगी, पंजाब में रहने वाले छात्र की पढ़ाई पंजाबी में होगी और महाराष्ट्र में रहने वाले छात्रों की पढ़ाई मराठी में होगी। नई शिक्षा नीति में कक्षा 5 तक की पढ़ाई की मातृभाषा में कराने का प्रावधान है।

कौशल विकास पर जोर देना

नई शिक्षा नीति में जो सबसे अच्छी बात है वह है नयी skills को जन्म देना। इस शिक्षा नीति में बच्चों को कक्षा 6 से ही अन्य तरह का ज्ञान जैसे कोडिंग, पेंटिंग, आदि भी उपलब्ध कराया जाएगा। अब बच्चा 6 वी क्लास से ही कोडिंग आदि तकनीकी शिक्षा ले पाएगा जिससे वह ऐप्स पर सॉफ्टवेयर बनाना आदि कार्य कर पायेगा इसका फायदा यह भी होगा कि अगर कोई बच्चा किसी कारणवश उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाता है या फिर उसको कहीं नौकरी नहीं मिल पाती है। तो वह अपना खुद का कुछ करके अपनी जिंदगी सफल बना पाएगा।

जैसे अगर उसको प्रोग्रामिंग का ज्ञान होगा तो वह सॉफ्टवेयर डेवलप करके लाखों रुपए कमा पाएगा। जापान, चीन जैसे कुछ देशों में यह व्यवस्था पहले से लागू है लेकिन अब भारत में भी यह सब संभव हो पाएगा।

विषयों की सीमा को खत्म करना

नई शिक्षा नीति मैं यह एक महत्वपूर्ण बात है कि अब इस नीति में से विषयों की सीमा को खत्म कर दिया गया है। पहले यह होता था कि दसवीं के बाद शिक्षा तीन भागों में बांट दी जाती थी पहला होता था कला(Arts) दूसरा कॉमर्स(commerce) और तीसरा विज्ञान(science)
इसमें समस्या यह थी कि अगर कोई विज्ञान का विद्यार्थी है तो वह अर्थशास्त्र(economy) जैसे विषय नहीं पढ़ पाता था और अगर कोई कॉमर्स का विद्यार्थी है तो वह भौतिकी (physics) नहीं पढ़ पाता।

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बोर्ड परीक्षाएं हुई आसान

नई शिक्षा नीति के तहत 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कई बदलाव किए जाएंगे। बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र अक्सर तनाव में होते हैं होता है। जिसकी वजह से उन्हें कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है तथा उन्हें रटकर पढ़ाई करनी पड़ती है। लेकिन नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाने की पूरी कोशिश की गई है। नई शिक्षा नीति में यह कहा गया है कि विभिन्न बोर्ड आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं के नये मॉडल तैयार करेंगे जिनमें विध्यार्थी की रटने की प्रवृत्ति के बजाय ज्ञान पर जोर दिया जाएगा।

ग्रेजुएशन हुई आसान

नई शिक्षा नीति में ग्रेजुएशन की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पहले यदि कोई छात्र पहले साल में ही कॉलेज छोड़कर चला जाता था तो उसे ग्रेजुएट नहीं माना जाता था। लेकिन नई शिक्षा नीति में 3 या 4 साल की ग्रेजुएशन में पहला साल पूरा करने पर Certificate दिया जाएगा दूसरा साल पूरा करने पर डिप्लोमा और उसके बाद डिग्री प्रदान की जाएगी। इससे कॉलेज स्टूडेंट्स को बहुत फायदा हो होगा।

GDP का 6% शिक्षा पर खर्च करना

भारत में अभी तक अपनी GDP का 1.7% पैसा शिक्षा पर खर्च किया जाता था। लेकिन नई शिक्षा नीति के बाद भारत अपनी पूरी जीडीपी का 6% भाग शिक्षा पर खर्च करेगा। कई बड़े देश अपनी शिक्षा व्यवस्था पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। और अब भारत भी शिक्षा के क्षेत्र में काफी ज्यादा खर्च करेगा। राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने यह सुझाव दिया था कि भारत को शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जीडीपी का लगभग 6% भाग खर्च करना चाहिए नई शिक्षा नीति में इसको स्वीकार कर दिया गया।

ऑनलाइन शिक्षा की ओर

भारत में ऑनलाइन शिक्षा बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षा को भी महत्व दिया जाएगा। ताकि शिक्षा सब तक पहुंच सके। भारत में कुछ ऐसे विकलांग बच्चे भी हैं जो स्कूल जाने में असमर्थ हैं। उनको भी इससे फायदा मिलेगा वह भी घर बैठे ही पढ़ाई कर पाएंगे। ऑनलाइन शिक्षा में कई तरह के ऐप्स,‌टीवी चैनल आदि के माध्यम से शिक्षा दी जाएगी।

इस आर्टिकल में हमने सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की। तो दोस्तों आपको यह आर्टिकल कैसा लगा? अगर आप अपनी ज्ञान की सीमा को और बढ़ाना चाहते हैं, तो आप हमारे फेसबुक पेज और हमारी वेबसाइट BriefingpediA पर विजिट कर सकते हैं।