दुनियां की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी Boeing Starliner हुई फेल

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दुनिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग द्वारा लांच किया गया बोइंग boeing starliner अपने मिशन में नाकाम हो गया| आपको बता दें कि बोइंग स्टार लाइनर को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से डॉक होना था लेकिन बोइंग  के स्पेसक्राफ्ट में लॉन्च होने के कुछ समय बाद ही गड़बड़ियां शुरू हो गई थी जिस कारण उसकी फ्यूल सप्लाई रुक गई थी| नासा के अनुसार बोइंग स्टार लाइन अंतरिक्ष तक जाते जाते आवश्यकता से कुछ ज्यादा ही ईंधन उपयोग कर लिया था जिसके चलते इस गड़बड़ी का सामना करना पड़ा|

अनुक्रम

Boeing starliner और NASA का कनेक्शन

दरअसल 2011 के बाद जब नासा का स्पेस शटल प्रोग्राम खत्म हो गया था तब से नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भेजने के लिए रशिया के सोयूज रॉकेट का उपयोग करता आया है लेकिन अब अमेरिका किसी दूसरे देश यानी कि रशिया पर से अपनी निर्भरता हटाना चाहता है|अमेरिका चाहता है कि अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री अमेरिका में बनी रॉकेट के सहारे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाएं जिससे अंतरिक्ष यात्रियों में आत्मविश्वास और बढ़ेगा और साथ ही अमेरिका को आर्थिक रूप से भी लाभ होगा|

इसी के चलते अमेरिका ने दो अमेरिकी कंपनियों को स्पेस में अंतरिक्ष यात्री ले जाने के लिए अच्छे लॉकेट डिजाइन और डिवेलप करने के लिए फंड किया है|यहां पर नासा ने खुद यह काम ना करके यह काम प्राइवेट कंपनियों को सौंपा है इसके लिए उन्होंने दो कंपनियां चुनी है जिनमें से एक है बोइंग एयरोस्पेस और दूसरी है स्पेस एक्स| स्पेस एक्स पहले ही दो रॉकेट को लॉन्च करके और उन्हें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से डॉक करके अपनी सफलता जाहिर कर चुकी है|

घटनाक्रम क्या हुआ था?

बोइंग का स्टार लाइनर एटलस V रॉकेट द्वारा  20 दिसंबर 2019 दिन शुक्रवार को सुबह 6:30 बजे लांच किया गया था| यह मिशन स्पेस स्टेशन पर कार्गो को डिलीवर करने के लिए और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से डॉक होकर नासा को अपनी क्षमताएं दिखाने, और सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लैंड होकर अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा का प्रदर्शन करने के लिए भेजा गया था ताकि नासा इसकी क्षमता देखकर बोईंग स्टार लाइनर को फाइनल टेस्ट में पास कर सकें जिसके बाद बोइंग नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन पर ले जाने के लिए चुन लिया जाता|

Boeing Starliner
Boeing Starliner

लेकिन उड़ान के कुछ समय बाद ही जैसे ही स्टार लाइनर रॉकेट से अलग हुआ तो वह पूरी तरह से अनस्टेबल हो गया जिस कारण उसे अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन की ओर भेजना लगभग नामुमकिन हो गया| इस स्थिति को “off-nominal Insertion” कहा जाता है|

नासा एडमिनिस्ट्रेटर Jim Bridenstine ने कहा –  बोइंग के स्टार लाइनर पर लगी हुई onboard clock पूरी तरह से sync नहीं थी जिस कारण स्पेसक्राफ्ट सिस्टम को ही भ्रम हो गया और ऑर्बिटल प्रोसीजर योजना के अनुसार नहीं हुआ|इस स्पसक्रेफ्ट ने अपने समय से पहले और जरूरत से ज्यादा ईंधन की खपत कर ली जिस कारण शायद इस स्पेसक्राफ्ट का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचना भी नामुमकिन हो जाता|

कंट्रोल सेंटर से इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए अनेकों प्रयास किए गए लेकिन जिस समय यह हादसा हुआ तब स्पेसक्राफ्ट Communication dead zone में था जिस कारण किससे संपर्क करना भी नामुमकिन था और बोईंग कण्ट्रोल रूम में बैठे वैज्ञानिक चाह कर भी इसकी दिशा को सही नहीं कर सकते थे|

Boeing starliner को हुआ बड़ा नुकसान

इस घटनाक्रम से बोइंग एयरोस्पेस कंपनी को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है यह नुकसान उसकी साफ-सुथरी प्रतिष्ठा को हुआ|अब बोइंग को नासा के सामने यह साबित करना होगा कि उनके द्वारा बनाई गई स्पेसक्राफ्ट और रॉकेट नासा के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं लेकिन हाल ही में हुए हादसे को देखकर तो यह बिल्कुल भी नहीं लगता| बोइंग को अब अपने स्पेसक्राफ्ट के मॉडल पर और अधिक काम करने की जरूरत है|

नासा को हो रहा भारी नुकसान

अगर बात करें तभी के समय की तो नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन पर भेजने के लिए रशिया के सोयूज रॉकेट का सहारा लेता है जो कि नासा को प्रति अंतरिक्ष यात्री 80 से 90 मिलीयन डॉलर के करीब पड़ता है और हर बार नासा चार या पांच अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन पर भेजता है और पिछले 30 सालों से ऐसा ही होता आ रहा है, ऐसे में अमेरिका का पूरा पैसा एक विदेशी कंपनी जा रहा है| 

अमेरिका ने बोइंग एयरोस्पेस और स्पेस-एक्स कंपनी को तकरीबन 8 बिलीयन डॉलर का फंड किया है ऐसे रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट डिवेलप करने के लिए जो कि अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित स्टेशन तक लेकर जा सके| और अमेरिका का यह प्लान है कि सन 2024 तक अमेरिका अपने ही रॉकेट में अंतरिक्ष यात्रियों को स्टेशन के लिए रवाना करेगा और इसका संभावित खर्चा नासा के अनुसार बोइंग के लिए प्रति अंतरिक्ष यात्री 90 मिलियन डॉलर तक आ सकता है और स्पेस-एक्स के लिए प्रति अंतरिक्ष यात्री 55 मिलीयन डॉलर तक आ सकता है, वैसे अगर मिलाकर देखा जाए तो यह रशिया के सोयूज रॉकेट से बहुत सस्ता होगा और ऐसे में अमेरिका सालों में ही अपने अरबों डॉलर बचा सकता है

अब आगे क्या?

नासा इस हादसे की जांच कर रहा है और बोइंग कंपनी भी पूरी तरह जांच में जुटी हुई है ताकि इस हादसे के पीछे का सही कारण पता लगाया जा सके|इसके बाद बोइंग स्टार लाइन हो दोबारा से अपनी क्षमता और अपने रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट की सुरक्षा को साबित करना होगा जिसके बाद नासा इस पर अपना फैसला सुनाएगा की बोइंग स्टार लाइनर उनके अंतरिक्ष यात्री को स्पेस स्टेशन पर लेकर जा सकता है या नहीं