ड्रोन कैमरा क्या है और यह कैसे बनता है ?

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आज के इस लेख में हम तकनीक और आधुनिक विज्ञान से जुड़े एक और नए विषय पर लेख लाए है, आज के इस लेख में हम ‘ड्रोन कैमरा’ पर विस्तार से बात करेंगे, इसका अर्थ, इसके प्रयोग , इसके प्रकार , और भारत मे इसके कानूनी प्रवधान और मौजूदा सिथति पर चर्चा करेंगे आइए अब हम आज के ईस लेख को प्रारम्भ करते हैं।

अनुक्रम

• ड्रोन कैमरा क्या होता है ? (What is Drone Camera ?)

अगर हम ड्रोन कैमरा की सामान्य परिभाषा की बात करे तो :- ड्रोन एक कैमेरयुक्त मानव रहित विमान है, जिसमें तार रहित तकनीक के ज़रिए इसे पृथ्वी की सतह ही नियंत्रित किया जा सकता है, इसे विभिन्न कार्यो के लिए प्रयोग किया जाता है जैसे :- फिल्मों की शूटिंग के लिए , पुलिस द्वारा सर्वेक्षण के लिए , कृषि में कीटनाशकों के छिड़काव एवं निरीक्षण आदि।

अगर हम सामान्य भाषा मे ड्रोन कैमरा के बारे में जाने तो ये एक उड़ने वाला ऐसा Electronic यंत्र है जो कैमरे से लैस होता है जिसको किसी रिमोर्ट या अन्य Wireless यंत्र के जरिए नियंत्रित किया जाता है , पिछले 5 वर्षों में इसके सामान्य प्रयोग में इजाफा आया है, अलग अलग जगहों पर ड्रोन कैमरे का प्रयोग किया जाता है चाहे वह कोई किसान हो या पुलिस अधिकारी सर्वेक्षण के लिए ड्रोन एक बेहद ही अचूक विकल्प है , दरअसल अगर हम इसकी सामान्य परिभाषा से हट कर इसकी भौतिकती (Physics) पर अधरीत सिद्धांतो पर चर्चा करे तो ये भौतिकी के Levitation सिद्धांत पर आधारित है |

आगे इस विषय बात करने से पहले इस विषय जटिलता को कम करने के लिए हम इसे दो भागों में विभाजीत करते है : (1) Quadcopter और दूसरा (2) Hexacopter दरअसल इन दोनों में ही क्रमशः Quad अर्थात 4 और Hex अर्थात 6 Propellers या फिर ब्लेड्स होते है |

अगर विज्ञान के बारे में हम विषय की जड़ पर जाए तो हमे मालूम होगा कि एक ड्रोन का बेहतर होने का पैमाना उसकी स्थिरता यानी Stability भी हैं इसका जोड़ ड्रोन की सभी Propellers के तालमेल से भी है, जिस ड्रोन के Propellers की बीच जितना अच्छा तालमेल होगा वह उतना ही बेहतर ड्रोन कैमरे की Footage ले पाता है, जैसे जैसे हम आज के आपने इस लेख में आगे बढ़ते जाएंगे हम ड्रोन कैमरा के सभी पैमानों पर चर्चा करेंगे।

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• ड्रोन कितने प्रकार के होते है : ( How many types of Drones are there ?) :

वैसे तो दुनिया भर में कई अलग-अलग कामो को करने के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जाता है और इन्हें उसी आधार पर विभाजित भी किया जाता हैं, पकन्तु फिर भी अगर हम ड्रोन कैमरा को किन्ही दो श्रेणियों में बाटे तो यह परिणाम सामने आता है :

(1) नागरिक ड्रोन ( Civilian Drone )

(2) सैन्य ड्रोन (Military – Army Drone)

आइए अब हम इन दोनों का एक एक करके अर्थ जाने, दरअसल जिस ड्रोन कैमरा का प्रयोग असैन्य कामो जैसे फिलन शूटिंग, सर्वेक्षण आदि के लिए किया जाता है उन्हें नागरिक ड्रोन की श्रेणी में बाटा जाता है |

वही दूसरी ओर जिन ड्रोन का उपयोग सैन्य कार्यवाहियों और सुरक्षा सर्वेक्षण में किया जाता है उन्हें सैन्य ड्रोन की श्रेणी में रखा जाता है, इस तरह के ड्रोन अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली और कुशल होते है सेना द्वारा कई सर्च ऑपरेशन और सट्राइक पर मोर्चा सम्भालने में ड्रोन का भारी-भरकम इस्तेमाल होता है, ना केवल सर्वेक्षण के लिए वैज्ञानिकों द्वारा कुछ ऐसे खास किस्म के ड्रोन बनाये गए है जो सिर्फ एक आदेश पर किसी निश्चित स्थान पर बमवर्षा कर सकते है इन ड्रोन की क्षमता किसी अन्य नागरिक ड्रोन की अपेक्षा काफी अधिक होती है , यह ड्रोन कैमरा किसी लड़ाकू विमान की तरह तेज और अधिक उचाई पर उड़ सकते है |

इनकी सबसे खास बात यह होती है कि यह बगैर किसी रेडार की नज़र में आये बहुत ज्यादा दूरियां तय कर सकते है इनकी सामान्य कीमत 60 लाख रुपये से लेखर 20 करोड़ रुपये तक होती है वही अगर हम किसी नागरिक ड्रोन की बात करे तो वह केवल 20 से 55 मिनट तक हवा में 80 से 180 फिट तक कि उचाई को तय कर सकते है, ई-बाज़ार और अन्य आउटलेट पर इनकी कीमत ब्रांड डर ब्रांड बदलती रहती है पर अंदाज इनकी कीमत 70 हज़ार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये के बीच हैं।

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• भारत मे ड्रोन कैमरा को लेकर कानूनी प्रवधान ( Legal provisons regarding Drones in india) :

हम ड्रोन कैमरा को 21वी शताब्दी के उन्नत तकनीक के किसी चमत्कार के रूप में देख भले ही सकते हैं , पर ये एक अत्यंत संवेदनशील वस्तु है, ऐसा इसीलिए कहा जा रहा है चूंकि ड्रोन के कैमरा युक्त होने के कारण इसे कही स्थानों की गोपनीयता के खिलाफ और अप्पत्तिजनक माना जा सकता है , ये एक सम्वेदनशील मुद्दा होने के कारण दुनियाभर की सरकारों ने इस पर वैधानिक कानूनों का निर्माण करना जरूरी समझ है, आज विश्व भर के कुछ भागों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश देशों के नागरिको को लाइसेंस और अन्य सरकारी जांच के बाद ड्रोन को उड़ाने का अधिकार दिया गया है परन्तु इसके लिए आपको इसके कुछ पहलुओं को समझना होगा |

भारत सरकार द्वारा भारत के किसी भी भाग में ड्रोन को उड़ाने के लिए नियनो की एक तालिका तय्यार की गई है जो कि निम्नलिखित है :

(1) निजी संपत्ति में ड्रोन कैमरा उड़ाने के लिए भारत मे सरकारी प्रावधान :

अपनी निजी संपत्ति के दायरे के भीतर आप बगैर किसी भी तरह की सरकारी इजाजत के ड्रोन उड़ा सकते है पंरतु आपको वहां यह ध्यान देना होगा कि आपका ड्रोन केवल आपकि निजी संपत्ति के ऊपर भी उड़ान भरे ना कि किसी सार्वजनिक या फिर अन्य व्यक्ति की संपत्ति पर, किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति पर ड्रोन या ड्रोन कैमरा जैसे अन्य यंत्रो का प्रयोग भारतीय दंड संहिता (IPC) के अनुसार एक दंडनीय अपराध है, अगर आप किसी अन्य व्यक्ति की निजी संपत्ति पर ड्रोन कैमरे को उड़ाना चाहते है तो आपके पास उस सम्पत्ति के मालिक की इजाजत या फिर अनआपत्ति प्रमाणपत्र (NOC) होनी चाहिए।

(2) सार्वजनिक संपत्ति में ड्रोन कैमरा उड़ाने के लिए भारत मे सरकारी प्रावधान :

भारत मे सार्वजनिक स्थानो पर ड्रोन कैमरा उड़ाने के लिए सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य है, इसके लिए आपको किसी पुलिस या फिर प्रशानिक अधिकरी जैसे राज्य जिलाधिकारी (SDM) से अनुमति लेनी होगी, अन्यथा बगैर अनुमति के ड्रोन कैमरे को उड़ान भारत मे गैर कानूनी है।

(3) ड्रोन कैमरा उड़ाते वक्त किसी व्यक्ति या सम्पत्ति को पहुचा नुकसान के लिए भारत मे कानूनी प्रावधान ( Legal provisions in India for damage to any person or property while flying a drone ) :

अगर आप किसी स्थान पर ड्रोन उड़ा रहे है और आपसे कोई हादसा अर्थात किसी निजी-सरकारी संपत्ति या व्यक्ति को कोई नुकसान पहुचता है तो प्रशासन या पुलिस उसपर क्या कार्यवाही करेंगी ?
अगर आपके मन मे भी ये सवाल उठ रहा है तो आइए अब हम इसपर बात करते है, दरअसल इस दौरान खोज-बिन में दो मुख्य तत्व या फिर बाटे देखी जाएंगे

• पहली की आपने उस काम को इरादतन (Intentionally) किया है या फिर आपसे वह किसी नियंत्रण त्रुटि (Control Error) के परिणामस्वरूप गैरइरादतन (non-intentionally) हुआ है, साथ ही यहां एक तकनीकी पहलू यह भी सामने आता ही किया क्या ऐसा उड़ान के दौरान किसी तकनीकी ख़राबी से हुआ है कि नही, वैसे साथ ही हम आपको यह बताते चले कि अकरत्वयिक तौर पर हर ड्रोन चाक की यह जिम्मेदारी है कि वह किसी ऐसे ड्रोन जिससे दुर्घटना होने पर व्यक्ति या सम्पत्ति का नुकसान हो सके उससे पहले इसका प्रशिक्षण ले ताकि वह इसके नियंत्रण से लेकर कई और तकनीकी पहलुओं को भी जान पाए।

• और दूसरा पैमाना यह हो सकता है कि उस दुर्घटना में कितने मूल्य की क्षति हुई है अगर अधिक है तो दंड का बल भी अधिक होगा, साथ ही इसी से जुड़ा दूसरा और आखिरी पहलू यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के होने से पहले आपने सार्वजनिक संपत्ति में या फिड साथ ही अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति में ड्रोन चलाने की कानूनी अनुमति ली है कि नही?।

इसी के साथ हमने ड्रोन कैमरा से जुड़े सभी अतकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर ली है अब हम इससे जुड़े कुछ तकनीकी पहलुओं पर बात करेंगे कि ड्रोन भौतिकी के किस सिद्धांत पर आधारित है एवं इसका अन्तर्विज्ञान (Anatomy) कैसा है, आइए अब हम इस

• ड्रोन कैमरा का अन्तर्विज्ञान ( Anatomy of the Drone Camera ) :

अगर आप जरा भी इलेक्ट्रॉनिक्स और पी.सी.बी के बारे में जनकारी रखते है तो आपके लिए ड्रोन का आंतरिक ढांचा समझना कोई ज्यादा मुश्किल बात नही हैं, यह थोड़ा जटिल है परंतु आजकल इसे कुछ तय्यार किये गए खंडों (Components) के जरिये बड़ी ही आसानी से समझा जा सकता हैं। ( निम्नदर्शित चित्र को देखें ) :

ड्रोन कैमरा को कुछ सामान्य भागो में विभाजित किया जाता है इन सभी कंपोनेंट्स को लाइन और कैट तारो के जरिये जोड़ा जाता है आइए अब हम ड्रोन के अंदरूनी भाग पर चर्चा करते है :

(1) प्रोपेलर : जिस प्रकार किसी पक्षी को उड़ान भरने में उसके पंख सहायता प्रदान करते है ठीक इसी तरह ड्रोन कैमरा को लिफ्ट (उड़ान) भरने में प्रोपेलर सहायता करते हैं, प्रोपेलर किसी पंखे में प्रयोग होने वाले ब्लेड्स होते है जो हवा में गोल घूमकर वायु पर दबाव डालते है जिससे हवा पर बल बनता है और अगर हम इस तथ्य की गहराई में जाए तो हमे मालूम होगा कि इस पूरे पराक्रम की व्याख्या न्यूटन ने अपने गति के ३ सिद्धांत में की है।

(2) रोटर : यह ड्रोन कैमरा की मोटर के भीतर लगी दो पट्टीदार गारारिया होती है, इसका प्रयोग ड्रोन की मोटर में बन रहे चुम्बलकीय आवेश को बर्षो पर केंद्रित करना होता है जिसके परिणामस्वरूप प्रोपेलर घूम पाते है।

(3) मोटर : यह एक सामान्य विधुचलित उपकरण है, जिसका प्रयोग ड्रोन में रोटर को घुमाने के लिए किया जाता है, साथ ही आगे रोटर के सिरों पर लगे प्रोपेलर ड्रोन कैमरा के उड़ान भरने का कारण बनते है, फिर भी अगर हम इससे हट कर इसकी तकिनिक व्याख्या में जाये तो यह है : मोटर एक ऐसा यंत्र है जो विद्युतीय ऊर्जा को यांत्रिकी ऊर्जा में परिवर्तित करता है, दरअसल ड्रोन कैमरों में यह मोटर आकर में बहुत सकरी या फिर कभी कभी कम चौड़ाई वाली होती है इसका वजन कम होता है परन्तु अपेक्षाकृत कार्यकुशलता अधिक होती है।

(4) इलेक्ट्रॉनिक गति नियंत्रक (Electronic Speed Control E.S.C) : यह एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक पी.सी.बी सिस्टम होता है जो ड्रोन कैमरा की सभी मोटर की गति की नियंत्रित करके उनके बीच तालमेल स्तापित करता है, यह सिस्टम ड्रोन की सभी मोटर के सामान्य चलन को भी सुनिश्चित करता है।

(5) फ्लाइट नियंत्रक (Flight Controller) : यह किसी भी ड्रोन का एक बहुत मुख्य भाग होता है, दरअसल ड्रोन का यही भाग ड्रोन के उड़ान भरने से लेकर उड़ान के दौरान उसके एक्शन और फिर उसके जमीन दोबारा वापस आने तक के सभी कमांड्स को एक्सीक्यूट (कार्यवाहन) करता है, यह किसी ड्रोन के लिए इतना आवश्यक होता है कि इसे ड्रोन के मस्तिष्क (दिमाग) तक कि संज्ञा दी जाती हैं, किसी भी ड्रोन कैमरा का यह भाग उसका एक बेहद कीमती भाग होता है जिसका सम्बन्ध ड्रोन के रोटर से लेकर सतह पर नियंत्रण के लिए रिमोर्ट तक होता है।

(7) ऊर्जा आपूर्त्ति बोर्ड (Power Distribution Board) : यह किसी कंप्यूटर (संकगंडक) में लगे मदरबोर्ड की तरह होता है, इसमे ड्रोन के सभी कंपोनेंट जुड़े होते है और यही से उन्हें ऊर्जा (Power) की आपूर्ति होती है यह सीधे ही लिपो बैटरी (Li-po Battery) से जुड़ा होता है।

(8) वीडियो एंटीना (Video antenna) : यह एक तलहिंन (Wireless) सिग्नल ट्रांन्समिशन यंत्र होता हैं जो ड्रोन में लगे कैमरे से जुड़ा होता हैं जो कैमरे से रिकॉर्ड हो रही वीडियो का बोर्ड स्क्रीन पर सीधा प्रसारण करता हैं।

(9) लिपो बैटरी (Li-po Battery) : यह कुछ खास तरह की बैटरी होती है जिनका प्रयोग ड्रोन में किया जाता है इनका Output Supply – और Input supply – होता है साथ ही यह बैटरी अन्य सामान्य उपकरणों में लगने वाली बैटरी की अपेक्षा अधिक कुशल और टिकाऊ होती हैं।

(10) गिम्बल या फिर वीडियो स्टेबलाइजर (Gimbal or Video Stabilizer) : जैसा कि आपको इस लेख की शुरवात में ही बताया गया था कि किसी भी ड्रोन को

अधिक कार्यकुशल और बेहतर तभी माना जाता है जब उससे बनी वीडियो में स्थिरता होती है पंरतु कई बार कुछ स्थानों पर दरों के उचाईयो पर उड़ने के कारण तेज हवा में नियंत्रण और तालमेल बिगड़ता है, जिस कारण रिकॉर्ड की गई वीडियो में स्थिरता की कमी नजर आती है इसी कमी को सही करने के लिए इसमें एक यंत्र का प्रयोग किया जाता है जिसे गिम्बल कहते है यह यंत्र ड्रोन में लगे बॉल कैमरे को स्थितर और रेकेर्डिंग का कोड बदले के लिए बेहद ही साफ और स्थिर अवसरथिति प्रदान करता है।

(11) कैमरा : किसी भी ड्रोन कैमरा में लगा कैमरा उसकी आँखों की तरह होता है यह ड्रोन की बेहद जरूरी और प्रयोगात्मक चीजो में से एक है, वैसे तो किसी भी कैमरे की कुशलता को भांपने के कई पैमाने होते है उन्ही में से उसका पिक्सल रेसोलुशन (Pixel resolution) है जिसके आधार पर आजकल कैमरों की कुशलता और कीमत को भांपा जा रहा है |

दरअसल जययादातर ड्रोन में Multi vison बॉल कैमरा इस्तेमाल किया जाता हैं, चुकी है बाकी दूसरे फ्लैट स्क्रीन कैमरा की अपेक्षा अधिक फ्रेम कवर कर सकता है साथ ही इस तरह के कैमरे में एक बहुत ज्यादा चौड़ा दृष्टिकोंड (Ultrawide Frame) में मिलता है जो ऊची से ऊंची जगह पर जाने के बाद कैमरे की फोटेज को एक अलग रूप प्रदान करता है ड्रोन में दिए गए कैमरे को कई सेटिंग की मदद से और भी कार्यकुशल बनाया जा सकता हैं साथ ही यह आपके खरीदे हुए ड्रोन के दाम और कुआलिटी पर भी निर्भर है।

(*7) ड्रोन कैमरा का रिमोर्ट नियंत्रक (Remote control of Drone) :
वैसे तो ड्रोन का रिमोर्ट एक सिंगल पी.सी.बी कॉम्पोनेन्ट होता है इसमे दोनों ओर बाए और दाएं में क्रमशः ड्रोन को आगे-पीछे और ऊपर-नीचे की ओर चलाने का तरीका होता हैं, ड्रोन में और भी कई विकल्प होते हैं साथ ही ड्रोन के नियंत्र से जुड़े भी कई सेटिंग रिमोर्ट में उपलब्ध होती है |

यह रिमोर्ट दो या फिर 4 ट्रिपल A (AAA) बैटरी-सैल की सहायता से चलते है और साबसे जरूरी चीज उसमे लगा रिसिविंग एंटीना होता है जो सिग्नल प्रोजेक्शन और केंद्रीकरण के काम आता है, कई बार Remote Control में लाइव वीडियो फुटेज देखने के लिए एक स्क्रिन दी जाती है अन्यथा इसमे दी गयी केबल की मदद से भी इसे मोबाइल के ज़रिए देखा जा सकता है।

• भावी संसार मे ड्रोन कैमरा का महत्व और प्रयोग (Drone’s Usage and Importace in the Upcoming World) :

हमेशा से ही ड्रोन को एक बहुत क्रांतिकारी अविषकर के तौर पर देखा गया है परन्तु अभीतक भी हम इसके प्रयोग का बड़े और अधिक कुशल स्तर पर परहयोग नही ले पा रहे हैं, यद्यपि इस पर कई सारी रिसर्च चल रही है जहां इन सभी चीजो के बारे में वैज्ञानिकों ने कुछ परिणाम निकले है इन्ही परिनमो और कुछ निजी कमापनियों द्वारा इसके प्रयोग के दावों के आधार पर हमने ड्रोन के भावी उपयोगों की एक सूची बनाई जिसे आप पढे और बताए कि इनमें से कौनसा आपको जल्द ही होता नजर आ रहा है। (सूची निम्नलिखित है)

• ड्रोन द्वारा यातयात साधनों का निर्माण फ्लाइंग कर की तर्ज पर साथ ही ड्रोन पैसेंजर टैक्सी और कार जैसे अन्य कुछ और सुझाव।

• ड्रोन द्वारा कुछ अतिआवश्यक वस्तुओं जैसे दवाइयों और कुछ और आपातकालीन मेडिकल सेवाओ की आपूर्ति।

• ड्रोन द्वारा खाद्य और भोजन सामग्रियों की ग्रह सुपूर्ती , पिज़ा, बर्गर आदि जैसे फास्टफूड की होम डिलीवरी।

• दुर्घटनाओं और आपदाओं के काल मे विशाल और प्रभावी रूप से खोजी और निरीक्षण कार्यो का वहन।

• भविष्य में शिक्षा के उद्देश्य से पृथ्वी पर मौजूद भौगोलिक और इतिहासिक केंद्रों की उच्च-स्तरीय अन्वेषण।

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