इनकम टैक्स क्या है? income tax kya hai?

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Income tax kya hai : दोस्तों किसी भी देश की सरकार को देश चलाने के लिए पैसे की जरूरत होती है और इस पैसे की पूर्ति कई तरह से की जाती है उन्हीं तरीकों में से एक है टैक्स यानी कि कर। सरकार लोगों पर कई तरह के कर लगाती है इन्हीं में से एक है आयकर यानी की इनकम टैक्स। भारत में भी सरकार लोगों से उनकी आय का कुछ भाग टैक्स के रूप में लेती है। अगर आपको नहीं पता कि income tax kya hai और आप जो हैं इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में बने रहिए क्योंकि यहां पर जानेंगे कि income tax kya hai

अनुक्रम

इनकम टैक्स क्या है? ( income tax kya hai )

income tax को हिंदी में आयकर कहते हैं. जो कि हमारी सरकार द्वारा इनकम पर लगाया जाता है. आयकर वह कर है. जो भारतीय लोगों पर भारतीय सरकार के द्वारा आय पर लगाया जाता है. आयकर सरकारों के क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित सभी संस्थाओं द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है. कानून के अनुसार प्रत्येक व्यवसाय और व्यक्ति, कर देने का एक कर वापसी के लिए पात्र है और उसे हर साल का आयकर रिटर्न फाइल करना होता है. जिसे हम आर.टी.आर (आयकर रिटर्न) भी कहते हैं.

उम्मीद है अब आप समझ गए होंगे कि income tax kya hai

आईए अब इसके बारे कुछ और जानकारी प्राप्त करते हैं?

Income tax kya hai

आयकर कानून को सूचित करने वाले आयकर अधिनियम 1961 में दिया गया है. यह तभी से ही हर भारतीय के आय पर लगता है. भारत में यह प्राय एक खास सीमा से अधिक आय वालों के द्वारा अदा किया जाता है. जैसे अगर आपकी इनकम 5 लाख सालाना है. तो आपको यह आयकर देना होगा और बुजुर्गों के लिए यह सीमा तीन लाख सालाना पर रखी गई है. हाल ही में इसमें कुछ चेंज आए हैं. जो अभी हम आगए बताएंगे।

Income Tax Types
Income tax types

टैक्स (कर) कितने प्रकार के होते है ?

भारत में मुख्यतः दो प्रकार के टैक्स होते हैं-

  1. प्रत्यक्ष कर (Direct Income Tax) – वह कर जो प्रत्यक्ष रूप से लिया जाता है.
  2. अप्रत्यक्ष कर ( Indirect Income Tax)- वह कर जो सरकार अप्रत्यक्ष रूप से हमसे लेती हैं.

प्रत्यक्ष टैक्स (Direct Income Tax) क्या है विस्तार में- 

प्रत्यक्ष कर वह कर जिसमें कर का प्रारंभिक भुगतान करने वाला व्यक्ति ही कर का अंतिम भार वहन करता है. अर्थात प्रत्यक्ष कर में कर के भार को दूसरे पर डालने की संभावना नहीं होती है.

भारत में प्रत्यक्ष कर से संबंधित सभी मामले 1 जनवरी 1964 से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( CBDT ) को सौंप दिए गए हैं. इसे राजस्व बोर्ड अधिनियम 1963 से अधिकार प्राप्त है. CBDT वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग का एक हिस्सा है. जितने भी प्रत्यक्ष कर लिए जाते हैं. वह इसी नियम के तहत लिए जाते हैं. इन करो में मुख्यतः आय कर, निगम कर, कैपिटल गेनस टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, कॉरपोरेट कर और गिफ्ट टैक्स आदि डायरेक्ट टैक्स के प्रकार हैं.

अप्रत्यक्ष टैक्स (Indirect Income Tax) क्या है विस्तार में-

चलिये अब जानते है कि indirect income tax kya hai। वह टैक्स जिसे सीधे जनता से नहीं लिया जाता किंतु उसका बोझ जनता पर ही पड़ता है. वह भी अप्रत्यक्ष रूप से जैसे देश में तैयार किए गयी वस्तुओं पर लगने वाला उत्पादन शुल्क और आयात या निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाला सीमा शुल्क. लेकिन दोस्तों जब आप इन सामान को या इन वस्तुओं को खरीदते हो. तो यह जो कंपनियां होती हैं. यह शुल्क आप पर ही लगाती है. जो आपको ही पे करना पड़ता है. जब भी आप कोई सामान खरीदते हैं तब. जिसे हम आम भाषा में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) भी कहते हैं. 

इनके अलावा भी बहुत से कर लगाए जाते हैं-

1. पंजीकरण शुल्क, स्टांप शुल्क, स्थानांतरण कर- इस स्टांप कर टैक्स का अधिनियम 1899 के तहत लगाया जाता था. लेकिन हाल ही में इसे 18-09-2018 में इस टैक्स में कुछ बदलाव किए गए थे. जिसमें इस टैक्स की फीस थोड़ी बढ़ाई गई थी. यह वही टैक्स है. जब हम कोई पंजीकरण स्टांप बनवाते हैं. तो हम से लिया जाता है. जो सीधे सरकार के खाते में जाता है. 

2. शिक्षा उप कर- यह वह कर है. जो भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए थे हैं और बनाए गए शैक्षिक कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए उन पर लगने वाले शुल्क प्रदान करते हैं. जो सरकार को दिए जाते हैं.

3. एंट्री टैक्स- एंट्री टैक्स वह कर होते हैं. जो भारत में राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए होते हैं. एक राज्य से दूसरे राज्य में माल की आवाजाही पर जो लगाए जाते हैं. जो सीधे ही राज्य सरकार लेती है.

4. रोड टैक्स या टोल टैक्स- रोड टैक्स या टोल टैक्स आपकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के साथ वसूल किया जाता है, जो आपको राज्य की सभी सड़कों पर गाड़ी चलाने की अनुमति देता है. अगर आपके पास टोल टैक्स नहीं है. तो आप उस राज्य की सड़कों पर गाड़ियां नहीं चला सकते. टोल टैक्स किसी सड़क की मरम्मत और निर्माण के लिए पैसा जुटाने के लिए व्यक्तियों से सड़क पर चलते समय वसूला जाता है.

5. प्रॉपर्टी टैक्स- संपत्ति कर आपकी संपदा कर के रूप में आप से लिया जाता है. यह प्रत्यक्ष कर राशि होती है. जो किसी अचल संपत्ति के स्वामी द्वारा उस संपत्ति के मूल्य के अनुसार अदा की जाती है. इस कर का अनुमान संपत्ति मूल्य के आधार पर लगाया जाता है. इसमें यह महत्वपूर्ण नहीं है. कि उस संपत्ति के स्वामी को कोई लाभ हुआ है या फिर नहीं यह संपत्ति कर हर हालत में देना ही पड़ता है.

6. व्यवसायिक कर- इस कर को आम भाषा में पेशा कर भी कहते हैं. व्यवसायिक कर भारत में राज्य सरकारों द्वारा लगाया और वसूला जाने वाला कर है. यह एक अप्रत्यक्ष कर है. पेशे से आय अर्जित करने वाला. व्यक्ति या पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, वकील, डॉक्टर इत्यादि. जैसे व्यवसाय करने वाले किसी व्यक्ति को इस व्यावसायिक कर का भुगतान करना पड़ता है. वह भी अपनी राज्य सरकार को.

7.मनोरंजन कर- इस कर को हम मनोरंजन कर के रूप में ही जानते हैं. किसी भी तरह के व्यवहार, व्यवसायिक, मनोरंजन पर लगाया जाने वाला कर. जैसे कि मूवी टिकट, प्रदर्शनी या खेल, कार्यक्रम और बहुत कुछ मनोरंजन वाली चीजों पर कर जो दे होता है. वह मनोरंजन कर के अंतर्गत आता है.

इन सभी कर का लगाने का उद्देश्य जनता को वस्तु और सेवा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त धनराशि इकट्ठा करना होता है. जैसे सड़क, सार्वजनिक शौचालय, सार्वजनिक यातायात, प्रमुख गेम आयोजन, सरकारी व्यक्तियों की सैलरी, मिड डे मील, सरकारी अस्पताल का खर्चा, वह सब इन्हीं टैक्सों से दी जाती है. इसलिए आप सभी को टैक्स देना चाहिए अगर आप टैक्स नहीं देते हैं. तो देश की इकोनॉमी नीचे गिर जाती है. जिससे देश में चलने वाला रुपया की वैल्यू दूसरे देशों में कम होने लगती है. यही कारण है कि आज $1 हमारे इंडिया में ₹75 का हो गया है.

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) क्या है-

इनकम टैक्स रिटर्न (Income tax return) जिसे हम इंग्लिश में आइ.टी.आर भी कहते हैं. वह एक फॉर्म होता है. जिसमें निर्धारित आयकर विभाग को अपनी आय और उसके बारे में जानकारी फाइल करनी होती है. यह विभिन्न प्रकार से की जाती है. जैसे I.T.R-1, I.T.R-2, I.T.R-3, I.T.R-4, I.T.R-5, I.T.R-6 और I.T.R-7, जब आप एक बैलेंसड रिटर्न दाखिल करते हैं. तो आपको निश्चित नुकसान उठाने की अनुमति नहीं होती है. यह एक्ट इनकम टैक्स 1961 और 1962 के रूल के अधिनियम के अनुसार फार्म किया जाता है.

अगर आम भाषा में कहें तो आय कर रिटर्न वास्तव में आपकी आमदनी और खर्च का लिखित हिसाब किताब है. जिसे आप केंद्र सरकार को विस्तार से यह जानकारी देते हैं. कि उस वित्त वर्ष में आपने अपनी नौकरी, कारोबार या पेशे से कितनी रकम कमाई और कहां पर निवेश की इसके साथ ही इसमें आप सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स बचत के विकल्प में निवेश करने, जरूरी चीजों पर खर्च करने या बिल जमा करने पर टैक्स छूट के बारे में और एडवांस टैक्स चुकाने की जानकारी भी देते हैं. जिससे आपको थोड़ा फायदा भी होता है.

आयकर का इतिहास

आयकर का प्रयोग कर वसूलने के लिए शुरू से नही किया जाता था। बल्कि इसका भी अपना एक इतिहास है। आयकर निकलने के लिए किसी व्यक्ति के खर्चो, आय और बचत सबका हिसाब रखना पड़ता है जो कि पुराने समय मे संभव नही था। इसके अलावा पुराने समय मे जमीन, संपत्ति, और सामाजिक पदों पर कर लगाया जाता था।

इस प्रकार के कर सबसे पहले मिस्र के साम्राज्य मे लगाए गए थे। उस समय ये कर आम समय मे संपत्ति का 1% होता था जबकि युद्ध की स्तिथि मे 3%। यह कर एक व्यक्ति पर कितनी जमीन, संपत्ति, पशु और दासों है, उसके अनुसार लगाया जाता था। इसके अलावा पुराने काल मे और भी कई साम्राज्यों मे आयकर लगाने का प्रयत्न किया गया।

मगर आज हम जो आयकर देखते है उसकी प्रथम शुरुआत 1799 मे ब्रिटैन मे ही हुई थी। यह उस समय के ब्रिटैन के प्रधानमंत्री विलियम पिट्स ने फ्रेंच आंदोलन के लिए हथियार खरीदने के लिये लगाया था।

आज हमने जाना कि income tax kya hai और इसका इतिहास क्या रहा है। तो दोस्तों आपको यह आर्टिकल कैसा लगा? अगर आप अपनी ज्ञान की सीमा को और बढ़ाना चाहते हैं, तो आप हमारे फेसबुक पेज और हमारी वेबसाइट BriefingpediA पर विजिट कर सकते हैं।

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